एल्गिन-चरसड़ी बांध के 100 मीटर हिस्से में आई दरार
खरपतवार के साथ बांस-बल्ली से नदी के पानी को रोकने में जुटा सिंचाई विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज(गोंडा)। घाघरा नदी से एल्गिन-चरसड़ी बांध में होने वाली कटान लगातार जारी है। नदी का जलस्तर जैसे-जैसे घट रहा है, कटान तेज होने लगी है। हालांकि अभी भी नदी खतरे के निशान से करीब 15 सेंमी ऊपर है। जिससे नदी के पानी का फैलाव लगातार हो रहा है। शुक्रवार को नदी में उठे मशीने से बांध के 100 मीटर हिस्से में दरार आ गई। इससे अनुमान है कि जल्द ही दरार वाला बंधे का भाग भी नदी में समा जाएगा। जबकि नदी से फैलने वाले पानी से किसानों की कई हेक्टेयर जमीन को भी घाघरा काटने में लगी है।
घाघरा का जलस्तर शुक्रवार को धीरे-धीरे नीचे सरकने लगा फिर भी खतरे के निशान से घाघरा अभी भी 15 सेंटीमीटर ऊपर है। गुरुवार को घाघरा नदी का जलस्तर 106.256 था तो वहीं शुक्रवार को जलस्तर घटकर 106.166 पर आ गया। घाघरा नदी की खासियत है कि जब इसका जलस्तर घटता या बढ़ता है तो उस वक्त नदी से होने वाली कटान तेज हो जाती है। शुक्रवार को कुछ ऐसा ही नजारा बंधे पर नजर आया। जब नदी में उठे मशीने से बांध के करीब 100 मीटर हिस्से में दरार आ गई। बांध के कट वन पर आई दरार से लगातार नदी का पानी बांध की मिट्टी को निशाना बना रहा है। जिससे दरार वाला हिस्सा कब नदी में समा जाए, नही कहा जा सकता। हालांकि सिंचाई विभाग के लोग बंधे को बचाने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं। लेकिन उनकी मेहनत कितना रंग लाती है तो यह तो समय ही बताएगा। बांध बचाने के लिए महज खरपतवार के साथ बांस-बल्ली से नदी के पानी को रोकने की कोशिशें हो रही हैं। 52 किलोमीटर लंबे रिंगबांध का अवशेष लगातार नदी में समाता जा रहा है। करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नकहरा, काशीपुर, घरकुंइयां, प्रतापपुर की ओर रुख कर चुका है। जिससे जलमग्न हो चुके गांवों में पानी तेजी से बढने लगा है। शुक्रवार को घरकुंइया के तीन, बाबा मांझा के दो, पूरे अंगद के दो, बहुवन मदार मांझा के तीन नये मजरे जो पानी से घिरे थे पानी भर जाने से जलमग्न हो गये।
इनसेट
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अर्चना वर्मा ने बताया कि घाघरा का पानी घटने लगा है मगर अभी खतरे के निशान से काफी ऊपर है। पानी करनैलगंज क्षेत्र में फैल रहा है जिससे गांव प्रभावित जरुर है मगर स्थिति काबू में है। लगातार क्षेत्र पर निगरानी कराई जा रही है जहां नांव की जरुरत है वहां नावें लगा दी गई हैं। बाढ़ चौकियों को लगातार एलर्ट पर रखा गया है।