सावन के पहले दिन मेघों ने गाया मल्हार
दिन भर हुई बारिश से किसानों की बांछें खिलीं, गरमी से मिली राहत
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। सावन के पहले दिन ही भगवान शिव की कृपा बरस पड़ी। सुबह से शुरू हुई रिमझिम बारिश के बीच जहां हजारों शिव भक्तों ने शिवालयों में पहुंचकर जलाभिषेक किया वहीं किसानों ने अपने खेत में पहुंचकर मेड़बंदी की और धान की रोपाई की। धान रोपाई का बेहतर मौसम व अच्छी खासी बरसात से किसान प्रफुल्लित हो उठे। हालांकि खरीफ की अन्य फसलें जैसे अरहर, उड़द, मक्का, तिलहन व अन्य फसलों की बोआई प्रभावित हो रही है। कहावत है कि 13 कार्तिक तीन अषाढ़ यानि किसानों को यदि आषाढ़ व सावन में तीन दिन का मौका मिले तो किसानों को इसी बीच बोआई कर देनी चाहिए।
बीते दस दिनों से प्रति दिन हो रही बारिश से किसानों की बांछें खिल गई हैं। जिले भर के किसानों ने खेत में पानी लगने के कारण धान की रोपाई शुरू कर दी है, जबकि अरहर, तिल, उड़द व अन्य फसलों की बोआई प्रभावित हो गई है। किसान इंतजार में हैं कि पानी बरसना बंद हो तो वे अन्य फसलों की बोआई करें लेकिन लगातार बारिश होने के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती दौर में ही किसानों को भारी बारिश होने से ज्यादा लाभ मिल गया है और करीब 30 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है और लगातार जारी है। जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने बताया कि धान रोपाई के लिए बेहतर स्थिति है। किसानों ने समय से बेरन लगाया था जो तैयार है।
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गरमी से मिली राहत
बारिश से तापमान में गिरावट हुई है और लोगों को गरमी से राहत महसूस हुई है। भीषण गरमी व उमस से लोगों को छुटकारा मिल गया है। सावन माह में हरियाली की नींव पड़ गई और गांवों में सावन का खास महत्व होता है। सावन में जहां गांवों झूले पड़ते हैं वहीं खेती किसानी के गीत लोग गुनगुनाते हैं।
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