शहर चुनें

अपना शहर चुनें

Top Cities
States

उत्तर प्रदेश

दिल्ली

उत्तराखंड

हिमाचल प्रदेश

जम्मू और कश्मीर

पंजाब

हरियाणा

विज्ञापन

7.61 करोड़ से 32 परिषदीय स्कूलों का होगा आधुनिकीकरण

लखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 24 May 2019 10:19 PM IST
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों आधुनिक बनाने के लिए पहली बार तमगे के साथ ही बजट की सौगात दी है। अभी तक मॉडल स्कूल, अंग्रेजी मीडियम स्कूल, स्मार्ट स्कूल आदि का दर्जा तो स्कूलों को मिला था लेकिन उन स्कूलों को नया लुक देने के लिए कोई बजट नहीं दिया जाता था। स्कूल अनुदान निधि समान रूप से ही हर स्कूलों को छात्र संख्या के आधार भी दी जाती थी। विशेष स्कूलों के लिए कोई अतिरिक्त बजट की व्यवस्था नहीं थी। इससे स्कूलों में गतिविधियां तो होती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी से बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाती थी। पहली बार प्रदेश की योगी सरकार ने स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधाओं को देने की पहल की है। प्रयोग के तौर पर इस साल से हर ब्लाक से दो-दो अच्छे स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में चिह्नित करेंगे और उन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों से लैस करने के लिए प्रत्येक स्कूल पर 23 लाख 80 हजार रुपये का बजट खर्च होगा।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर वैसे तो पूरे प्रदेश के 75 जनपदों में 822 ब्लाकों के 1576 प्राइमरी व उच्च प्राथमिक स्कूलों को आधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए 375 करोड़ 8 लाख 80 हजार का बजट तय किया है। इसी में गोंडा के 16 ब्लॉकों के 32 स्कूलों में शामिल किया है, जिनके लिए 7 करोड़ 61 लाख 60 हजार रुपये का बजट तय किया गया है। इसी माह स्कूलों के चयन का आदेश बेसिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं। गुरुवार को ही जारी आदेश में हर ब्लाक से एक हिंदी और एक अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के चयन करने और बजट की डिटेल तैयार करने का आदेश दिया गया है। पहली बार बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों को बड़े पैमाने पर स्थाई आधुनिक संसाधन से लैस करने के लिए बड़े स्तर पर बजट खर्च करने का निर्णय लिया है। बीएसए मनिराम सिंह ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से स्कूलों की सूची और वहां की आवश्यकताओं की रिपोर्ट भी मांगी है। माना जा रहा है कि इस पहल से स्कूलों की सूरत तो बदलेगी ही, कान्वेंट स्कूलों से बेहतर स्थिति प्राइमरी स्कूलों की होगी। हर ब्लाक में दो-दो स्कूल लिए जाने से यह अन्य स्कूलों के लिए उदाहरण के तौर पर होंगे और इससे अन्य स्कूलों में प्रोत्साहन के लिए कार्य करने की लगन दिखेगी। माना जा रहा है कि जिले में विभिन्न कार्यक्रमों से स्कूल के शैक्षिक परिवेश को बेहतर बनाने वाले स्कूलों को इस योजना में स्थान मिल सकेगा। बीएसए भी मानते हैं कि बजट मिलने से स्कूलों की स्थिति में बड़े स्तर पर सुधार होगा। अभी तक शिक्षक शैक्षिक गतिविधि तो कर रहे थे, लेकिन सुविधाओं की कमी से बच्चों का आकर्षण टिकाऊ नही हो पा रहा थ।

चयनित स्कूल टाइल्स से चमकेंगे, चलेंगी डिजिटल क्लास
हर ब्लाक में चिह्नित दो स्कूलों को टाइल्स से चमकाने के साथ ही डिजिटल क्लास भी संचालित होंगे। पुस्कालय के साथ ही लैब स्थापित होंगे। हर स्कूल के लिए 23 लाख 80 हजार रुपये का बजट तय किया गया है। जिसमें स्कूल में बाउंड्री पर एक लाख रुपये, शौचालय व मूत्रालय के लिए 50 हजार रुपये, टाइल्स, कोटा स्टोन के लिए 6 लाख 25 हजार रुपये, फर्नीचर के लिए 3 लाख 50 हजार, सोलर सिस्टम के लिए 5 लाख, पुस्तकालय व सांइस लैब के लिए एक लाख, डिजिटल के लिए एक लाख, व्हाइट बोर्ड के लिए एक लाख, स्कूलों को बच्चों के लिए पेंटिंग से आकर्षक बनाने के लिए एक लाख 50 हजार रुपये, रनिंग वाटर सुविधा के लिए एक लाख 50 हजार रुपये, खेल सामग्री के लिए 30 हजार रुपये, माइक सिस्टम, ड्रम सिस्टम के लिए 50 हजार रुपये, वाटर कूलर के लिए 30 हजार रुपये, झूले के लिए 50 हजार रुपये, शैक्षिक खिलौने के लिए 10 हजार रुपये, सांइस, मैथ व लैंग्वेज लैब के लिए 50 हजार रुपये तथा अग्निशमन यंत्र के लिए 10 हजार रुपये मिलेंगे।

दर्जा तो मिला पर नही मिले थे अभी तक संसाधन
जिले में 200 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो नवाचार के लिए जाने जाते हैं। इन्हे नवाचार मुहिम करने वाले स्कूल का दर्जा मिला और बीएसए मनिराम सिंह ने सम्मानित भी किया। इसी तरह अब तक करीब 96 अंग्रेजी मीडियम स्कूलों को बीते साल में संचालित कर दिया गया है, वहीं 180 नए प्राइमरी स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम घोषित करके संचालित किए जाने की कवायद हो रही है। प्राइमरी स्कूल करनैलगंज व झंझरी के रानीपुरवा को बीते तीन सालों से मॉडल स्कूल घोषित किया जा चुका है। इन सबके बाद भी स्कूलों को कोई अतिरिक्त बजट भी तक नही दिया गया था। दो दर्जन से अधिक स्कूलों को शिक्षकों ने अपने स्तर से स्मार्ट स्कूल के रूप में संचालित कर रखा है, उन्हें भी सरकार की ओर से कोई मदद नही मिली है।

आपरेशन कायाकल्प से 1000 स्कूलों की बदली थी सूरत
बीते साल में बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों की सूरत बदलने के लिए आपरेशन कायाकल्प शुरू किया गया था। पंचायत राज के बजट से करीब 8 करोड़ रुपये खर्च करके 1000 स्कूलों की सूरत बदलने का कार्य हुआ था। इन स्कूलों की मरम्मत या बाउंड्री के कार्य ही हो पाए थो। सुनियोजित ढंग से हर सुविधा नही मिल पाई थी। अब बजट मिलने से बड़ा बदलाव दिखेगा।

माडल स्कूलों को बजट देने के लिए शासन की ओर से निर्देश मिले हैं। इसके लिए कार्रवाई की जा रही है। इससे स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव दिखेंगे।
- मनिराम सिंह, बीएसए
विज्ञापन

Recommended

Spotlight

विज्ञापन

Recommended Videos

Next
Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।