गोंडा। जिले की 154 ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों पर शिकंजा कस गया है। विकास कार्यों में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता की शिकायतें आने पर डीपीआरओ ने जांच शुरू कराई है। जांच शुरू होने के बाद प्रधानों और सचिवों में खलबली मच गई है।
एक तरफ मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है तो दूसरी ओर गांवों में कराए गए विकास कार्यों पर सवाल उठाते हुए लोग शिकायत कर रहे हैं। मनरेगा के साथ विभिन्न विकास योजनाओं में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। कार्य कराए बगैर धनराशि निकाल लेने की भी शिकायतें आम हैं। पंचायत भवनों में संसाधन खरीदने के नाम पर गड़बड़ी का आरोप है।
विकास खंड करनैलगंज के पैरौरी बबुरास निवासी प्रदीप कुमार सिंह ने डीएम को पत्र देकर गांव के विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया है। गांवों से मिलने वाली शिकायतों के बाद पंचायतीराज विभाग ने शिकंजा कस दिया है। 154 ग्राम पंचायतों की शिकायतों की जांच शुरू कराई गई है। डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि जांच कराई जा रही है। गड़बड़ी मिलने पर संबंधित प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीज किया जा चुका वित्तीय अधिकार
बभनजोत ब्लॉक की ग्राम पंचायत केशवनगर ग्रंट की प्रधान पुनीता देवी के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार डीएम प्रियंका निरंजन ने सीज कर दिया है। गांव के दिगराज सिंह ने 31 मई को गांव में हुए विकास कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि नाली और इंटरलॉकिंग कार्य में 17 लाख 94 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है। इसके लिए प्रधान और सचिव पुष्पाराज सिंह को दोषी पाया गया है। सचिव के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।