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धरती की कोख खोखली कर रहे 150 अवैध आरओ प्लांट

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गोंडा में रानी बाजार स्थित एक घर में लगा आरओ प्लांट। - फोटो : GONDA
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गोंडा। बिना भूगर्भ विभाग की अनुमति के जिले भर में 150 छोटे आरओ प्लांट तथा 300 वाहन धुलने के स्टेशन संचालित हैं। प्रतिदिन दस लाख लीटर पानी का दोहन करने के बाद शेष करीब पांच लाख लीटर पानी बेकार जा रहा है। कुटीर उद्योग का रूप ले चुके पानी के इस गोरखधंधे पर एनजीटी ने भी आपत्ति दर्ज करायी है और मानक को पूरा न करने वाले ऐसे धंधों को बंद करने पर जोर दिया है।
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जलनिगम की रिपोर्ट के अनुसार जिले में शुद्ध पेयजल की गुणवत्ता बहुत कम ही है। नदियों के किनारे बसने वाले गांवों तथा शहरी क्षेत्र में आर्सेनिक, आयरन, फ्लोराइड व क्लोराइड सहित तमाम सूक्ष्म तत्वों की वजह से पानी पीने लायक नहीं रह गया है। इसका लाभ उठाते हुए जिले भर में छोटे-छोटे आरओ प्लांट स्थापित हो गए। वाहनों पर पानी की टंकियां रखकर 20 रुपये से लेकर 30 रुपये प्रति डिब्बा बेचा जा रहा है। आरओ का पानी बताकर बेचने से जहां धंधा करने वाले मालामाल हो रहे हैं वहीं इनके दोहन से भूगर्भ में वाटर लेबिल गिरता जा रहा है। हालांकि जियोलॉजिकल विभाग ने जिले में वाटर लेवल सुरक्षित बताया है लेकिन यह भी आशंका व्यक्त की है कि जिले में अवैध रूप से जिस तरह से पानी का दोहन हो रहा है उससे भूगर्भ जल को खतरा उत्पन्न हो गया है। जिले में एक आरओ प्लांट से प्रतिदिन दस हजार लीटर पानी का दोहन होता है। इसमें पीने लायक केवल तीन हजार लीटर पानी ही बचता है, जबकि सात हजार लीटर पानी बेकार चला जाता है। इसी तरह 300 स्टेशन वाहन धुलने वाले बने हैं। यहां भी प्रतिदिन दस हजार लीटर पानी का दोहन होता है। यहां पीने लायक पानी पूरी तरह नालियों बह जाता है। पानी का रिचार्ज न होने से पानी का संकट बढ़ सकता है।
ये हैं आरओ प्लांट लगाने के नियम
आरओ वाटर प्लांट के लिए जिला उद्योग केंद्र में पंजीकरण हो तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी होनी चाहिए। फूड कॉर्पोरेशन से भी एनओसी लेनी चाहिए। इसके बाद प्लांट लगाने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार कर, प्लांट लगाने के स्थान का स्टेटा क्या है, सुरक्षित जोन में है या क्रिटिकल जोन में है। चिल्ड करने का स्थान, बचने वाला पानी रिचार्ज हो रहा है या नहीं, पैन, आधार, जीएसटी आदि का कोरम पूरा करने के बाद प्लांट लगाने वाले को भूगर्भ विभाग में एनओसी के लिए आवेदन करना होता है। इसकी जांच होने के बाद यदि विभाग सहमति व्यक्त करे तो आरओ प्लांट लगाया जा सकता है।
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सात मीटर से अधिक वाटर लेवल नहीं होना चाहिए
भूगर्भ जल विभाग की मानें तो आरओ वाटर उस स्थान पर लगाया जा सकता है जहां पर पानी का स्तर सात मीटर से कम हो। यानि 50 प्रतिशत सुरक्षित हो। यदि इससे अधिक है तो वाटर लेवल क्रिटिकल जोन में माना जाएगा।
प्रतिदिन देनी होती है रिपोर्ट
नियम है कि आरओ वाटर प्लांट लगाने के लिए सभी को अपने यहां पीजोमीटर लगाना अनिवार्य है। इससे प्रतिदिन वाटर लेवल नापा जाएगा और इसकी रिपोर्ट भूगर्भ विभाग को देनी होती है। लेकिन यहां बिना एनओसी के 150 आरओ प्लांट संचालित हैं और किसी के यहां पीजोमीटर नहीं लगा है।
शीघ्र होगी कार्रवाई
गोंडा में अवैैध रूप से आरओ प्लांट संचालित हैं। केवल पांच को ही एनओसी जारी की गई है। प्रतिदिन पांच लाख लीटर से अधिक पानी बेकार जा रहा है। करीब एक साल पहले कमिश्नर के आदेश पर जिले के सभी आरओ प्लांट बंद करा दिए गए थे लेकिन अब ये फिर से संचालित हो रहे हैं। बीते 25 जुलाई को प्रदेश सरकार ने भूजल एक्ट पास किया है। अभी उसका पूरा ब्योरा नहीं आया है। शीघ्र ही इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -विक्रांत, सीनियर हाईड्रोल्योजिस्ट, देवीपाटन मंडल
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