पंचायत चुनाव का समय नजदीक आने के साथ गांवों में सियासत तेज हो गई है। सियासत का असर गांवों के विकास पर भी देखा जा रहा है। अधिकतर ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप हो चुके हैं। ग्राम प्रधान वोटरों कोे लुभाने के लिए चहेतों के ऊपर सरकारी धन लुटा रहे हैं।
आम जनता को सियासत का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। डेढ़ सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप हैं। प्रधान व विरोधी एक दूसरे की कमियां बताने में जुटे हुए हैं। अमर उजाला टीम ने ग्राम पंचायतों के विकास पर जांच-पड़ताल की तो तमाम खामियां पाई गई हैं। पेश है एक रिपोर्ट-
जिले के 667 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष जुलाई माह में वित्तीय वर्ष 2015-16 में डेढ़ सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्य ठप पाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2015-16 में ही जून माह में भी 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में मनरेगा से संबंधित विकास कार्य ठप रहे। 127 ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2015-16 में अप्रैल माह से ही मनरेगा काम शुरू नहीं हो सका है।
पंचायत चुनाव की सरगर्मी का ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। ग्राम प्रधान चुनाव की तैयारियों में व्यस्त होने के कारण विकास कार्यों की तरफ ध्यान कम दे रहे हैं। नए नियम के अनुसार अब हर महीने मनरेगा कार्यों के लिए शासन से बजट का आवंटन किया जा रहा है।
माह के अंतिम दिन तक बजट खर्च न होने पर धनराशि स्वत: लैप्स हो जाती है। सभी बीडीओ, ग्राम पंचायत सचिव व ग्राम प्रधानों को मनरेगा के माध्यम से गांवों में काम कराने का निर्देश दिया गया है।
-रामाश्रय, सीडीओ बलरामपुर