गोंडा। जनपद न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत लगी। लोक अदालत में 1,48,421 वादों का निस्तारण करते हुए 11,62,32,799 रुपये की समझौता राशि तय की गई।
कार्यक्रम का आयोजन प्रशासनिक न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी, जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष दुर्ग नारायण सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनील कुमार, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अशोक कुमार यादव सहित न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव अपेक्षा सिंह ने बताया कि न्यायालयों द्वारा 7,073 वादों का निस्तारण करते हुए 21,35,650 रुपये जुर्माना वसूला गया। वहीं मोटर दुर्घटना वादों में 4,95,13,172 रुपये प्रतिकर राशि दिलाई गई। प्री-लिटिगेशन के माध्यम से विभिन्न विभागों व बैंकों से जुड़े 1,41,348 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें 11,62,32,799 रुपये की सुलह राशि तय हुई। लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, बीएसएनएल तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर वादों के निस्तारण में सहयोग किया।
न्याय तक सभी की पहुंच आसान बनाना लोक अदालत का उद्देश्य : न्यायमूर्ति
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए प्रशासनिक न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाकर आम लोगों को सुलभ न्याय उपलब्ध कराना ही लोक अदालत का मुख्य लक्ष्य है। यह तभी संभव है जब न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और प्रशासन आपसी समन्वय से कार्य करें। जिला जज दुर्ग नारायण सिंह ने कहा कि लोक अदालत आपसी समझौते और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के त्वरित निस्तारण का प्रभावी माध्यम है, जिससे लोगों को कम समय में राहत मिलती है। कार्यक्रम को जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल तथा बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया और लोक अदालत की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।