बांध टूटने से 27 मजरों में तबाही का मंजर
गोंडा। भिखारीपुर-सकरौर तटबंध टूटने से सोनौली मोहम्मदपुर गांव के 27 मजरों में बाढ़ के पानी ने तबाही मचा दी है। गांव में चारों ओर परेशानी का मंजर नजर आने लगा है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों का यहां से पलायन शुरू हो गया है। ग्रामीणों ने तटबंध पर शरण ली है।
गांव के लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन भी जुटा है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। मगर वह नाकाफी है।
सोनौली मोहम्मदपुर गांव के मजरे बच्ची माझा के पास भिखारीपुर-सकरौरा बांध का 50 मीटर हिस्सा शुक्रवार की देर शाम नदी में समा गया। बांध टूटते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। चारो ओर पानी ही पारी नजर आ रहा है। बाढ़ के पानी ने अब तक 27 मजरों में तबाही मचा रखी है।
ग्रामीण अपना घरबार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। घरों में पानी घुस जाने से ग्रामीणों की दुश्वारियां बढ़ गई है । शुक्रवार की शाम बांध के टूटते ही प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया था। बांध टूटने के बाद से एडीएम रत्नाकर मिश्र, मुख्य राजस्व अधिकारी विनय प्रकाश श्रीवास्तव, एसडीएम तरबगंज सौरभ भट्ट सहित तहसीलदार व अन्य अधिकारी गांव में कैंप कर रहे हैं।
लेखपाल व अन्य कर्मचारियों की टीम बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हुई है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पल्ली, लाई व पूड़ी सब्जी का वितरण किया जा रहा है।
बांध टूटने के बाद से ही पूरी रात व शनिवार को ग्रामीण अपने घरों का सामान निकालकर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने तटबंध के बचे हुए हिस्से पर डेरा डाला है।
बाढ़ के पानी का दायरा बढ़ता जा रहा है। एक के बाद एक मजरे बाढ़ के पानी से प्रभावित हो रहे हैं। देर रात बाढ़ की चपेट में 30 और मजरों के चपेट में आने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर पहुंचाने प्रशासन के लोग जुटे हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जेई को दौड़ाया
-बांध टूटने के बाद शनिवार की सुबह स्थिति का जायजा लेने पहुंचे चीफ इंजीनियर विनोद कुमार निरंजन, जेई घनश्याम चौधरी पर ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों का कहना था कि बारिश के मौसम से पहले बांध का मजबूत करने का काम हो गया होता तो बांध टूटता नहीं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जेई व अन्य कर्मचारियों को दौड़ा लिया। बाद में प्रशासन के हस्तक्षेप पर ग्रामीण शांत हुए। ग्रामीण जेई पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। जेई का कहना है कि ग्रामीण नाराज थे मगर दौड़ाने की बता गलत है।
बाढ़ चौकियों से नदारद रहते अधिकारी
बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे तरबगंज तहसील के लगभग 125 गांव के ग्रामीणों के समस्या समाधान के लिए बनी बाढ़ चौकियों पर राजस्व विभाग को छोड़कर अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी जाने से कतरा रहे हैं।
तहसील में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बनी 14 बाढ़ चौकियों पर सभी सरकारी महकमों के जिम्मेदार लगाए गए हैं, लेकिन आलम यह है कि तहसील कर्मियों को छोड़कर अन्य विभागों के कर्मी चौकियों पर जाना नहीं चाहते और अगर जाते हैं तो पिकनिक मना कर चले आते हैं।
बाढ़ पीड़ितों की सहायता को अपील
बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए भट्ठा मालिकों, ग्राम प्रधानों, स्वयं सेवकों तथा क्षेत्र के संभ्रांत व्यक्तियों से राहत सामग्री वितरण करने का लेखपालों के माध्यम से अपील की गई है।
एसडीएम सौरभ भट्ट ने बताया कि तरबगंज तहसील में संभ्रांत और संपन्न लोगों की कमी नहीं है ऐसे में अच्छे लोग बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए उदार मन से स्वयं राहत सामग्री अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में वितरित कराएं। जिससे प्राकृतिक आपदा में मदद मिल सके।