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एक साल में ही जर्जर हो गया 52 लाख रुपये से बना स्कूल

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एक साल में ही जर्जर हो गया 52 लाख से बना स्कूल
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जान हथेली पर रखकर शिक्षा ग्रहण कर रही बेटियां
उमानाथ तिवारी/रमेश मिश्रा
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत परसपुर के त्योरासी में वर्ष 2015 में 52 लाख रुपये की लागत से बनाया गया राजकीय बालिका विद्यालय एक साल में ही जर्जर हो गया। विद्यालय के निर्माण में न तो मानकों का ख्याल रखा गया और न ही उसकी गुणवत्ता परखी गई। इस लापरवाही से स्कूल के दरवाजे खिड़िकियां सब टूट गए और छत लटक गई। अब बरसात में छत से टपक रहे पानी के बीच अपनी जान हथेली पर रखकर बेटियां इस स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को आठवीं की पढ़ाई के बाद गांव से दूर न जाना पड़े इसके लिए परसपुर के त्योरासी में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत यहां राजकीय बालिका विद्यालय के निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। वर्ष 2015 में 51.90 लाख रुपये की भारी भरकम राश से इस विद्यालय का निर्माण कराया गया। निर्माण के दौरान इसकी देखभाल व मानकों के जांच की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों की थी लेकिन जिम्मेदारों ने इस तरफ से अपनी आंखें बंद कर ली और इसके निर्माण की गुणवत्ता को देखना जरुरी नहीं समझा। अफसरों की निगेहबानी के अभाव में कार्यदायी संस्था ने जिम्मेदार अफसरों के साथ मिलकर सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया। इस खेल में विद्यालय निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। शासन की नजर में निर्माण को पूरा दिखाने के लिए वर्ष 2016 में जैसे तैसे एक चपरासी के भरोसे इस स्कूल का संचालन शुरु करा दिया गया। विद्यालय का निर्माण कराते समय अफसर यहां तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था करना भी भूल गए। यहां नौवीं कक्षा में 35 व दसवीें में 37 बेटियों का नामांकन है लेकिन इन बेटियों को स्कूल पहुंचने का रास्ता नहीं है जिससे इन्हे गन्ने के खेतों पर बनी पगडंडियों के सहारे स्कूल तक जाना पड़ता है। स्कूल में न बिजली है और न ही पीने के लिए पेयजल की व्यवस्था है। विद्यालय के चारों तरफ लोगों ने अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा जमा रखा है। स्कूल की बाउंड्रीवाल भी नहीं बनी है। स्कूल के दरवाजे व खिड़कियां सब टूट चुके हैं। सबसे बड़ी खामी यह कि विद्यालय निर्माण के एक वर्ष के भीतर ही इसकी छत जर्जर हो गई। छत पर पानी भरा हुआ है और छत लटक गई है। स्कूल में अंग्रेजी विषय के शिक्षक की तैनाती नही हैं। बावजूद इसके यहां पढने वाली 72 छात्राएं खेतों के बीच से होकर जाने वाली पगडंडियों के सहारे स्कूल पहुंचती है और अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल में पढ़ाई करती हैं। स्कूल की प्रधानाध्यापिका गीता त्रिपाठी ने बताया कि रास्ते की मांग को लेकर कई बार जिला स्तरीय अफसरों को पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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शिक्षिका अपने वेतन से कराती है स्कूल की सफाई
गोंडा। स्कूल के चारों तरफ जंगली घास व झाडिय़ा उगी हुई हैं। यहां साफ सफाई के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका गीता त्रिपाठी ने बताया कि स्कूल की सफाई उन्हें अपने वेतन से एक हजार रुपये प्रतिमाह देने पड़ते है तब जाकर स्कूल की सफाई हो पाती है।
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डीएम अंकल रास्ता बनवा दो प्लीज
राजकीय बालिका विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं ने जिलाधिकारी से स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता बनवाने की मांग की है। विद्यालय की छात्रा अर्चना पांडेय ने बताया कि स्कूल के चारों तरफ की जमीनों पर कब्जा हो जाने के कारण रास्ता बंद हो गया है। शिकयत पर लेखपाल व कानूनगो आए भी तो बिना रास्ता बनवाए बैरंग वापस हो गए। छात्रा एकता तिवारी ने बताया कि रास्ता न होने के कारण खेतों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। माया देवी व चांदनी का कहना है कि अगर डीएम अंकल चाहें तो रास्ता बन सकता है। इन छात्राओं ने जिलाधिकारी से स्कूल का रास्ता कब्जेदारों से मुक्त कराये जाने की मांग की है।
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राजकीय बालिका विद्यालय त्योरासी में प्रधानाध्यापिका समेत पांच लोगो की तैनाती है। शिक्षकों के अभाव में अंग्रेजी विषय के अध्यापक की तैनाती नहीं हो सकी है। अन्य समस्याओं के जानकारी कराकर उसके निराकरण का प्रयास किया जायेगा।
एमपी सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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