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124 समिति के सभापति व उप सभापति का चुनाव आज

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124 समिति के सभापति व उप सभापति का चुनाव आज

गोंडा। साधन सहकारी समितियों के सभापति व उप सभापति के चुनाव के लिए मंगलवार को सभी 124 समितियों पर कड़ी सुरक्षा में मतदान होगा।

इसके लिए जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी जेबी सिंह की ओर से समितियों में चुनाव कराने के लिए आरओ व एआरओ नामित कर दिये गये हैं। जिले के 124 समितियों के 124 सभापति व उप सभापति के चुनाव के लिए समितियों के निर्वाचित 1116 डेलीगेट मतदान करेंगे।

जिले में कुल 129 साधन सहकारी समितियां है जिसमें से 118 साधन सहकारी समिति, सात विशेष सहकारी समिति व तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियां शामिल हैं। कुल समितियों में से अलग अलग विवाद को लेकर पांच समितियों में चुनाव नही हो रहा है।
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117 समितियों में डेलीगेट पद के लिए एक एक ही डेलीगेट के नामांकन करने से वहां निर्विरोध निर्वाचन हो जाने से सोमवार को वहां डेलीगेट के लिए मतदान नही हुआ। मंगलवार को मात्र सात समितियों में डेलीगेट पद के लिए मतदान हुआ।

जिसमें से 63 डेलीगेट निर्वाचित घोषित किए गए। निर्विरोध व निर्वाचित सदस्यों में से कुल 1116 डेलीगेट अब समितियों के सभापति व उप सभापति को चुनने के लिए मंगलवार को मतदान करेंगे।

साधन सहकारी समिति पिपरा पदुम का चुनाव निरस्त

गोंडा। साधन सहकारी समिति पिपरा पदुम का चुनाव निरस्त हो गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी जेबी सिंह ने यह कार्रवाई समिति के चुनाव में धांधली किये जाने की शिकायत पर की है। ग्राम ठोरहंस निवासी त्रियुगी नारायन पांडेय ने जिला निर्वाचन अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को पत्र देकर शिकायत की थी कि सत्ता पक्ष के कुछ लोगों ने दबाव में उसे 20 जनवरी को झंझरी ब्लाक में नामांकन नही करने दिया।

इसे अधिकारियों ने गंभीरता से लिया। 25 जनवरी को जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस पर कार्रवाई करने के लिए एआर को आदेश दिया। इस बावत सहायक आयुक्त व सहायक निबंधक राम सागर ने समिति के निर्वाचन की सभी प्रक्रिया को निरस्त कर करने की घोषणा कर दी है।

उन्होंने बताया कि इस समिति का चुनाव निरस्त कर दिया गया है। एआर ने बताया कि इस तरह की विवादित कुल पांच समितियों में चुनाव बाद में कराया जाएगा।

समितियों की मलाई भी माननीयों को ही चाहिए। मंगलवार को 124 समितियों के सभापति व उप सभापति की कुर्सी के लिए जिले के कई माननीयों ने अपने घर के सदस्यों के अलावा रिश्तेदार व अन्य करीबियों को उतार दिया है।

समिति की मलाई हाथ से न जाने पाए इसके लिए इसके लिए नामांकन प्रक्रिया से ही अपने लोगों को डेलीगेट पर निर्विरोध निर्वाचित कराने का हथकंडा शुरू कर दिया था। कई स्थान पर तो लोगों को नामांकन तक नही करने दिया।
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यही हथकंडा अब सभापति व उप सभापति के चुनाव में अपनाने का रणनीति बना लिया है। इस समय समिति के चुनाव को लेकर गंवई सियासत फिर गर्मा गई है। जिले के कई प्रभावशाली व राजनीतिक हस्तियों ने अपने लोगों को समिति की बागडोर दिलाने की चक्रव्यूह तैयार कर दिया है।
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