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Gonda News: समाधान से कोसों दूर हैं 61 करोड़ के कर्जदार 12 हजार अन्नदाता

Fri, 22 Nov 2024 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। खाद-बीज व कृषि यंत्रों के लिए ऋण देकर किसानों के सुख-दुख में साथ खड़े होने वाले सहकारी ग्राम विकास बैंक कर्ज वसूली के लिए शिकंजा कस रहे हैं। किसानों का आरोप है कि मूलधन से कई गुना अधिक धनराशि वसूल की जा रही है, लेकिन ऋण के समाधान का कोई रास्ता नहीं दिखाया जा रहा। जिससे मंडल के 12 हजार किसान वर्षों से 61 करोड़ के कर्ज में डूबे हुए हैं। मंडलायुक्त ने सहकारिता विभाग को ऋण निस्तारण कर किसानों को सहूलियत दिलाने का निर्देश दिया है।
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मंडल में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की 13 शाखाएं संचालित हैं। जहां किसानों को खेती करने के लिए ऋण दिया जाता है। कई वर्षों इन बैंकों में लेनदेन तो कम हो गया, लेकिन किसानों पर पुराने कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। 12 हजार 375 किसानों पर 60 करोड़ 96 लाख आठ हजार रुपये की कर्ज बना हुआ है। अन्य सरकारी व प्राइवेट बैंक अपने पुराने बकायेदारों की फाइल राष्ट्रीय लोक अदालत में भेजकर निस्तारित करा लेते हैं, लेकिन सहकारिता विभाग ने अभी तक एक भी बार लोक अदालत में फाइलें नहीं भेजीं।
अधिवक्ता एके मौर्य ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर किसानों का कर्ज लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित कराने की मांग की है। जिसको गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने उपायुक्त सहकारिता को पत्र भेजकर नियमानुसार प्रतिमाह किसानों का कर्ज निस्तारित कराकर प्रकरणों की स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया है।
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तरबगंज के गंगाराम मौर्य ने मंडलायुक्त को प्रार्थनापत्र देकर बताया कि उन्होंने 12 दिसंबर 2014 को डेयरी योजना के तहत दो लाख 20 हजार रुपये का ऋण लिया था। कुछ दिनों बाद भैंस चोरी हो गई, जिसकी एफआईआर दर्ज कराकर विभाग को सूचना दी गई। वहीं, कर्ज के एक लाख 73 हजार 560 रुपये जमा कर दिए हैं। गंगाराम का कहना है कि अब 63 वर्ष उम्र में कर्ज चुका पाने में समर्थ हूं। उन्होंने समाधान के जरिए कर्ज मुक्ति की मांग की है।
बैंक अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव का कहना है कि अन्य बैंकों की भांति उत्तर प्रदेश ग्राम विकास बैंकों के ऋण के मामले भी लोक अदालतों में लाए जाने चाहिए। जिससे दशकों से कर्जदार बने किसानों को राहत मिले।
सहायक निबंधक (सहकारिता) अशोक कुमार का कहना है कि ग्राम विकास बैंक के मामले राष्ट्रीय लोक अदालत में भेजने का प्रावधान नहीं है। मंडलायुक्त का पत्र मिला है, जिस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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