जिले में 11823 गरीब परिवारों के पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। ऐसे गरीबों को इंदिरा आवास तो आवंटित हुए लेकिन पैसे न मिलने के कारण वह अधूरे खड़े है। बारिश के मौसम में ऐसे परिवारों के सामने सिर छिपाने की परेशानी है।
सबसे अधिक दिक्कत उन 1098 गरीब परिवारों के सामने हैं जिनके आवास की दीवारें वर्ष 2012-13 में ही खड़ी हो गई लेकिन दूसरी किस्त न मिलने के कारण आज तक छत नहीं पड़ पाई हैं। इन्हें किस्त तो पुराने रेट से मिलेगी लेकिन निर्माण सामग्री की मौजूदा कीमत काफी बढ़ गई है। ऐसे में गरीबों को दूसरी किस्त मिलने के बाद भी आवासों पूर्ण कर पाना चुनौती है।
वित्तीय वर्ष 2014-15 के 10725 इंदिरा आवास दूसरी किस्त न मिलने के कारण अधूरे हैं। दूसरी किस्त के रूप में 37.5 करोड़ रुपये मिलें तो गरीबों के अधूरे आवासों पर छत पड़े। इंदिरा आवास योजना के तहत आवास विहीन गरीबों को पक्की छत वाला एक आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
वित्तीय वर्ष 2012-13 तक इस योजना के लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए दो किस्तों में 35 हजार रुपये दिए जाते थे। इसके बाद आवास निर्माण की लागत 35 हजार रुपये से बढ़ा कर 70 हजार रुपये कर दी। अब लाभर्थियों को दो किस्तों में 35-35 हजार रुपये दिए जाते हैं।
वर्ष 2012-13 के 1098 गरीबों को योजना के तहत अभी तक पहली किस्त ही मिल पाई है। दूसरी किस्त के 11250-11250 रुपये मिलने शेष हैं। तीन साल बाद जब मंहगाई करीब दो गुनी हो गई है तो 11250 रुपये में गरीबों की छत बनना चुनौती से कम नहीं।
वित्तीय वर्ष 2014-15 के 10725 गरीबों के आवास की छत भी अधूरे पड़ी हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 में योजना का लाभ 10725 गरीबों को दिया गया था। इन्हें पहली किस्त के 35-35 हजार रुपये एक साल पहले मिले थे।
बीते जनवरी-फरवरी माह तक इन्हें आवास निर्माण की दूसरी किस्त के 35-35 हजार रुपये मिलने चाहिएं थे लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। आवास निर्माण की दूसरी किस्त के रूप में 37 करोड़ 53 लाख रुपये मिले तो गरीबों के अधूरे आवासों की छत पड़े सके।