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करनैलगंज तहसील के दो गांवों में एक शजार बीघा भूमि का घोटाला

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भूमाफिया ने हड़प ली एक हजार बीघा सरकारी जमीन
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गोंडा। तहसील क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि घोटाले को मंडलायुक्त ने गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयुक्त ने एसडीएम करनैलगंज से पत्रावली तलब करने के साथ ही मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त के इस कदम से भू-माफियाओं में खलबली मच गई है।

करनैलगंज में तहसील की स्थापना से पहले यहां का क्षेत्र तहसील तरबगंज में था। वर्ष 1987 में तहसील करनैलगंज की स्थापना की गई। इसके बाद तरबगंज से अभिलेखों का स्थानान्तरण तहसील करनैलगंज में कर दिया गया।
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इसी समय राजस्व कर्मियों के साथ साठगांठ कर भू-माफिया ने करीब एक हजार बीघा अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करा लिया। राजस्व ग्राम लालेमऊ और बसेरिया में सरकारी भूमि बंजर, नवीन परती, जलमग्न, खलिहान व ग्राम समाज के खातों में दर्ज भूमि का अभिलेेेखों में पट्टा दर्शाकर नामांतरण बही और पट्टा प्रमाण रजिस्टर में बिना दर्ज कराए ही खातेदारों के नाम दर्ज कर दिया गया।

इसका खुलासा दिसंबर 2016 में तब हुआ जब तत्कालीन एसडीएम हरिशंकर लाल शुक्ल को एक गोपनीय प्रार्थना पत्र मिला। जिसमें पुराने अभिलेखों की नकल और खतौनी में दर्ज नामों की सूची मिली।

यही नहीं भूमि का पट्टा दिखाकर नाम से दर्ज किए जाने की सूचना के साथ ही गांव या जिले के बाहर रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी भूमि दर्ज होने की शिकायत तत्कालीन एसडीएम को मिली।

जिसमें जिले व प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के साथ ही सरकारी नौकरी करने वाले करीब दो दर्जन लोगों के नाम पट्टा दर्शाया गया है। एसडीएम ने कुछ भूमिधरी खाताधारकों के नाम के खातों को खंगालना शुरू कराया तो किसी भी पुराने अभिलेखों में इसकी पुष्टि नहीं हुई।

भूमि करीब एक हजार बीघे से अधिक होने का अनुमान है। इसके लिए गोंडा अभिलेखागार से पुराने अभिलेखों को खंगाला गया तो पट्टा सम्बंधी कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद अक्टूबर 2017 में तहसीलदार ने लालेमऊ गांव में भूमि पर काबिज 113 लोगों को नोटिस जारी कर दी। बसेरिया के भूमि घोटाले की जांच अभी ठन्डे बस्ते में है।

नोटिस जारी करने के बाद तहसील प्रशासन ने दोबारा इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया। तहसील प्रशासन ने इस अवैध पट्टो को निरस्त व अवैध रुप से काबिज लोगों को बेदखल करने की अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की। तहसीलदार राम नारायन वर्मा ने 1994 के एक पट्टेदार को मिले पट्टे का उदाहरण देते हुए सभी अवैध पट्टेदारों का पट्टा वैध करार दे दिया।

जिसकी शिकायत एक व्यक्ति ने तहसील दिवस में आयुक्त देवी पाटन मंडल से की तो आयुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम करनैलगंज से पत्रावली तलब करते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

फैजाबाद, बाराबंकी व बस्ती के लोगों को दे दिया पट्टा
भूमि घोटाले के खेत में राजस्व विभाग ने पट्टा देने से पहले इसकी भी पड़ताल नहीं की। जिन्हें जिस गांव में पट्टा दे रहे हैं। वहां उस गांव के रहने वाले हैं या नहीं। राजस्व कर्मियों ने लालेमऊ गांव में फैजाबाद, बाराबंकी व बस्ती जनपद के एक दर्जन से अधिक लोगों को भूमि का पट्टा दे दिया।
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फर्जी तरीके से सरकारी भूमि अपने नाम से दर्ज कराने के मामले की जानकारी है। सभी भूमिधरों को नोटिस भेजकर उनसे पट्टा पुष्टि प्रमाण पत्र मांगा गया था। मगर प्रमाण नहीं मिला है, सभी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी और भूमि का पट्टा निरस्त कराया जाएगा। माया शंकर यादव, एसडीएम करनैलगंज
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