अब तरबगंज के 125 गांव बाढ़ की चपेट में
गोंडा। जिले की चार तहसीलों में से दो तहसील क्षेत्र के करीब 200 गांव अब तक बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। तरबगंज क्षेत्र के करीब 125 तथा करनैलगंज के 75 गांव बाढ़ की विभीषिका का दंश झेल रहे हैं।
इन गांवों के डेढ़ लाख से अधिक लोगों पर बाढ़ का संकट और गहराता जा रहा है। करनैलगंज की ग्राम पंचायत नकहरा व काशीपुर का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है, जबकि अन्य गांवों की स्थिति भी खराब है।
एल्गिन-चरसड़ी बांध कटने के बाद घाघरा ने परसपुर में भिखारीपुर सकरौर बांध को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। भिखारीपुर सकरौर बांध के स्पर नंबर चार व पांच पर घाघरा की ठोकर पड़ने से बांध लगातार कमजोर होता जा रहा है।
दोनों स्परों को बोल्डर डालकर बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इतना ही नहीं उमरी बेगमगंज के पास उमरी बंधा व ऐलीपरसौली बांध पर भी संकट मंडराने लगा है।
तरबगंज तहसील क्षेत्र में लगातार बाढ़ की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। अब तक नौ ग्राम पंचायतें इसकी जद में हैं। इन ग्राम पंचायतों के करीब 125 गांवों में जीवन बद से बदतर हो चुका है।
बुधवार रात भी बाढ़ के पानी ने महेशपुर, ऐलीपरसौली और सोनौली मोहम्मदपुर को चपेट में ले लिया। जिन्हें खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों में नावों की संख्या बढ़ाकर 81 कर दी गई है।
सभी कर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है। एसडीएम तरबगंज सौरभ भट्ट की मानें तो बाढ़ से छह गांवों के 37 मजरे ही प्रभावित हैं। इनमें जैतपुर माझा के भुटकुन पुरवा कटान की जद में है।
वहां से 15 परिवारों के 73 लोगों को बाहर निकालकर पटपरगंज बाढ़ राहत शिविर पहुंचा दिया गया है। सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित गांव ऐलीपरसौली है।
इस गांव के 32 मजरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। जैतपुर के तीन व बहादुरा सलौनी मोहम्मदपुर का एक-एक मजरा बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित है।
कटरा भोगचंद का वजीराबाद पूर्व माध्यमिक विद्यालय पानी भरने से बंद है। गांव के लोग व बच्चे यहां पानी में मस्ती कर रहे हैं। दुल्लापुर के दो मजरों को छोड़कर सभी मजरे बाढ़ के पानी से घिरे हैं।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या की मानें तो इस समय घाघरा नदी का जलस्तर 93.270 पर रुका है। देर रात से पानी घटने के संकेत मिल रहे हैं।
परसपुर के इकनिया मांझा के सामने भिखारीपुर सकरौर बांध के इसी स्थान पर 2017 में स्पर नंबर पांच तकरीबन सात से साढ़े सात मीटर कटकर बह गया था। जिसकी इस बार मरम्मत करा दी गई है।
इसी स्पर से सटकर नदी बह रही है। जिससे हो रही कटान रोकने के लिए बैकरोलिंग सिल्टिंग करा के उस जगह को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।