24 घंटे में 750 बीघा जमीन निगल गई घाघरा
गोंडा। क्षेत्र में बाढ़ का कहर जारी है और दिनोंदिन स्थिति बदतर होती जा रही है। वहीं बाढ़ पीड़ितों का हाल हकीकत में बेहाल जैसा हो चुका है। बाढ़ पीड़ित भगवान भरोसे हो चुके हैं। कोई बांध पर तो कोई बाढ़ चौकी पर।
चार दिनों से भूखे प्यासे बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ किट का वितरण बुधवार को किया गया। बाढ़ पीड़ितों के सामने पशुओं के चारे, खुद के भोजन और शुद्ध पेयजल की सबसे बड़ी समस्या बन कर खड़ी हो गई।
बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या 63 पहुंच गई है। बुधवार की शाम को 68 सेंटीमीटर खतरे के निशान से घाघरा ऊपर थी। अब तक 350 घर पानी में समाते चुके हैं। 24 घंटे के भीतर 750 बीघा जमीन घाघरा ने निगल लिया है।
बुधवार को ग्राम पंचायत दिवली, पूरे अजब, पूरे अंगद, रेक्सडिय़ा के करीब एक दर्जन से अधिक मजरों में पानी भर गया। जिससे अब बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 25 और बाढ़ से प्रभावित मजरों की संख्या बढ़कर 63 हो चुकी है।
वहीं घाघरा लगातार कटान में मशगूल है। जहां तक पानी पिछले 8 वर्षों में आई बाढ़ में नहीं पहुंचा था वहां घाघरा कृषि योग्य जमीन को काटकर अपनी धारा प्रवाहित करने लगी है। ग्राम कमियार, नैपूरा, बांसगांव, परसावल, बेहटा, नकहरा व काशीपुर के सामने नदी करीब 750 बीघे से अधिक जमीन काटकर पिछले 24 घंटे में अपनी धारा में समाहित कर चुकी है।
कटान तेजी से जारी है जिस पर किसी भी तरीके का अंकुश लगा पाना नामुमकिन हो चुका है। तो दूसरी तरफ अस्थाई रिंग बांध कटने के बाद उसका दायरा बढ़ कर करीब 1 किलोमीटर में हो गया है। और घाघरा की धारा तेजी से फैल कर लगातार करनैलगंज तहसील क्षेत्र के गांव की ओर तेजी से बढ़ रही है।
इनसेट
पेयजल का संकट गहराया, बाढ़ में लगे नल का पानी पीने को विवश
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों को प्रशासन भले ही राशन किट और अन्य खाद्य पदार्थ का वितरण कर उनकी भूख मिटाने में कामयाब हो। मगर बाढ़ से प्रभावित लोगों को शुद्ध पेयजल की सबसे बड़ी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। गांव के अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह बाढ़ के पानी से डूबे हुए हैं और उन्हें पेयजल के संकट से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों में रामलखन, दुलारे, शिव मंगल, राम प्रसाद, नरेश, राम सिंगारे, सुधा देवी, रामफल आदि का कहना है कि किसी तरह से मुंह के निवाले का इंतजाम अगर कर लिया जाए तो पानी का इंतजाम नहीं हो पाता है। गांव में अगर एक हैंडपंप पानी में डूबने से बचा है तो पूरे गांव के लोग उसी हैंडपंप से पानी लेकर आते हैं। जिससे बाढ़ के पानी की दुर्गंध आती है। फिर भी उस पानी को पीना मजबूरी बन गया है।
पशुओं के चारे का संकट भी हुआ गहरा
जैसे जैसे बाढ़ अपना दायरा बढ़ाती जा रही है वैसे वैसे ग्रामीणों के सामने उनके पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। फसलें और जानवरों का चारा बाढ़ के पानी से डूबा हुआ है। तथा खेतों में फसल पानी भरने की वजह से बर्बाद हो रही है। तो पशु भी भूख से तड़प रहे हैं।
प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर पशुओं के चारे के तौर पर भूसे का इंतजाम किया है। मगर ग्रामीणों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर पशुओं के लिए भूसा लेने बाढ़ चौकियों पर आना पड़ता है। जिससे बाढ़ पीड़ित पशुओं का चारा नहीं जुटा पा रहे हैं।
तमाम बाढ़ पीड़ित पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों या बांध पर बस गए हैं जहां प्रशासन पशुओं के चारे को नहीं पहुंचा पा रहा है। और तमाम पशु भूख से बिलख रहे हैं। जहां पर पानी कम है वहां लगी फसल को काटकर पशुओं को खिलाया जा रहा है। पशु पालक बाढ़ पीड़ित बेबस दिखाई दे रहे हैं।
प्रशासन का दावा, सिर्फ 24 गांव बाढ़ की चपेट में
एसडीएम गुलाम सरवर कहते हैं कि केरनैलगंज क्षेत्र में अब तक 24 मजरे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। जिसमें 17 मजरे ऐसे हैं जहां घरों में पानी घुस गया है और बाकी मजरे को पानी ने चारों तरफ से घेर रखा है।
31 नावें लगाई गई हैं तथा बाढ़ राहत किट का वितरण भी बुधवार से शुरू कर दिया गया है। गांव में बीमारी फैलने से रोकने के लिए दवाओं का छिड़काव, क्लोरीन गोली का वितरण तथा जानवरों के लिए के तौर पर भूसे की व्यवस्था की गई है। जिसका वितरण कराया जा रहा है।
नवाबगंज क्षेत्र में लगाई गईं 66 नावें, संपर्क मार्ग कटा
नवाबगंज। बाढ़ क्षेत्र में पांच गांव सर्वाधिक प्रभावित हैं, जबकि नौ गांव आंशिक रुप से प्रभावित हैं। इन नौ गांवों में 66 नावें लगा दी गयी हैं। पटपरगंज से होकर चौखड़िया व तुलसीपुर माझा जाने वाली सड़क बाढ़ के पानी में कट गया।
तुलसीपुर माझा के पूरे अर्जुन निवासी दिनेश यादव ने बताया कि बाढ़ के पानी से आज तड़के गांव से आने वाली सड़क कट गया, जिससे लोगों के आवागमन में दिक्कतें हो रही है।
इस सड़क पर पीपे का छोटी से पुलिया बनी हुयी थी। इन बाढ़ ग्रस्त गांवों की निगरानी के लिए शासन व प्रशासन ने 11 बाढ़ चौकी एक्टिव कर रखा है पर तरबगंज तहसीलदार बृजमोहन यादव को अपनी सभी बाढ़ चौकी का नाम ही नहीं याद है।