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विदेशी मेहमानों की भीड़ से गुलजार हुई पार्वती-अरंगा झील

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हजारों किलोमीटर दूर से आकर प्रवासी पक्षियों ने जमाया डेरा

गोंडा। ठंड में हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले पक्षियों का जमावड़ा पार्वता और अरंगा झीलों में लगना शुरू हो गया है। हालांकि अभी इनकी संख्या काफी कम है। बावजूद इसके अलग-अलग प्रजातियों के दर्जनभर पक्षियों की आमद यहां हो चुकी है। लेकिन जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे ठंड में इजाफा होगा, वैसे-वैसे और भी पक्षी यहां आएंगे।

मुख्यालय से 38 किलोमीटर दूर भितरी गांव से होकर बहने वाली जिले दो महत्वपूर्ण झीलें पार्वती व अरंगा अपनी ऐतिहासिक महत्ता के लिए दूर-दूर तक जानी जाती हैं। इन झीलों में प्रतिवर्ष ठंड की शुरूआत होते ही प्रवासी पक्षियों का आना-जाना शुरू हो जाता है। जो यहां दो से तीन महीने रहने के बाद फिर से अपने वतन को लौट जाते हैं।
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जिसके पीछे सबसे खास बात यह है कि जिस वतन में यह प्रवासी पक्षी रहते हैं वहां ठंड के दिनों में इतनी बर्फ पड़ती है कि वहां रह पाना इनके लिए मुमकिन नहीं होता। यही कारण है कि ठंड की शुरूआत होते ही यह प्र्रवासी पक्षी यहां आ जाते हैं और जैसे ही ठंड कम होनी शुरू होती है यह फिर से अपने वतन को लौट जाते हैं।

दिसंबर महीने में पड़ रही ठंड के मद्देनजर अभी तक यहां जम्मू-कश्मीर से आने वाले लालसर, पाकिस्तान से आने वाले नीलसर, बांग्लादेश व उत्तरी अमेरिका, यूरेशिया से आने वाली तिदारी बतख, श्रीलंका से आने वाली शिवाडुबडुबी, श्रीलंका सहित यूरोप व उत्तरी अमेरिका से आने वाली सींकपर के साथ ही यूरेशिया, तिब्बत व लद्दाख से आने वाली ठेकरी का आगमन यहां हो चुका है। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ भी यहां आनी शुरू हो गई है।


पार्वती-अरंगा पक्षी विहार के रेंजर भानू प्रकाश श्रीवास्तव की मानें तो हजारों किलोमीटर की यात्रा करके यह पक्षी ठंड के दिनों में यहां दो से तीन महीने प्रवास करने के लिए आते हैं। इस दौरान यह पक्षी झील के सैवाल व मछलियों को खाकर यहीं प्रवास करते हैं। इन विदेशी सैलानियों को किसी से कोई नुकसान न हो, इसके लिए पूरे झील की रात-दिन निगरानी की जाती है।

वहीं नाविक बसंत की मानें तो जैसे-जैसे ठंड में इजाफा होगा, वैसे-वैसे और भी पक्षी यहां आएंगे। जबकि सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ एके श्रीवास्तव का कहना है कि झील की गश्त प्रवासी पक्षियों की आमद को देखते हुए बढ़ा दी गई है। ताकि कोई इन पक्षियों का शिकार न कर सके।

पार्वती-अरंगा हैं दो अलग-अलग झीलें
पार्वती और अरंगा दो अलग-अलग झीलें है। इसमें से पार्वती झील जहां 12 किलोमीटर लंबी व एक किलोमीटर चौंड़ी है तो वहीं अरंगा झील की लंबाई 5 किलोमीटर व चौंड़ाई एक किलोमीटर हैं। जबकि दोनों ही झींलों का महत्व भगवान शंकर से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता है कि पार्वती झील भगवान शंकर की तपोस्थली रही है। जबकि अरंगा में देवी पार्वती खुद जाकर भगवान शंकर को अर्घ्य देती हैं।
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ईको टूरिज्म घोषित है पक्षी विहार
पार्वती-अरंगा पक्षी विहार को प्रदेश सरकार ईको-टूरिज्म का दर्जा दे चुकी है। जिसके तहत इस पक्षी विहार को मार्डनाइज किया जाना है। तीन साल पहले तत्कालीन आयुक्त ने शासन को तीन करोड़ रुपए का प्रस्ताव इस झील के सौन्दर्यीकरण के साथ ही यहां तक पहुंचने वाली सडक़े की मरम्मत को लेकर भेजा था। जिससे यहां की सडक़ें तो बन गई, लेकिन अभी भी झील के सौंदर्यीकरण का काफी काम यहां होना बाकी है।
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