उतरौला क्षेत्र में राप्ती नदी की कटान कई गांवों में कहर बनकर टूट रही है। अल्लीपुर बुजुर्ग गांव के पास करीब 100 मीटर सुरक्षा बांध नदी में समाहित हो चुका है। कई किसानों के खेत भी नदी में विलीन हो चुके हैं। ग्रामीण खुद बांध व खेत बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। नदी की कटान रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रयास न किए जाने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
विदित हो कि उतरौला तहसील क्षेत्र के अल्लीपुर बुजुर्ग, मटियरिया, नंदौरी, महुवा धनी, फत्तेपुर व बमनपुर आदि समेत एक दर्जन गांवों की राप्ती नदी में तेजी से कटान हो रही है। इन गांवों को नदी की विभीषिका से बचाने के लिए बनाया गया सुरक्षा बांध भी कटान की जद में है।
अल्लीपुर बुजुर्ग गांव के निकट करीब 100 मीटर बांध नदी की धारा में समाहित हो चुका है। इन गांवों के किसानों की खेती योग्य जमीन भी नदी में विलीन हो रही है।
अल्लीपुर के रामरंग, सजीवन, चिन्नू, मटियरिया निवासी सहदेव, पप्पू, गुड्डू, हीरालाल व राम सागर, नंदौरी निवासी सुरेश, रामतीरथ, धर्मराज, भारत व निरंजन आदि की करीब 50 बीघा जमीन भी नदी में विलीन हो चुकी है। बांध तथा किसानों की जमीन बचाने के लिए प्रशासन द्वारा किया जा रहा प्रयास महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है।
ग्रामीण व किसान खुद बांध व जमीन को कटान से बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। नंदौरी गांव के पास बांध में हो रही तेजी से कटान को रोकने का प्रयास बालू भरी बोरियां डालकर स्थानीय लोग कर रहे हैं। लोगों ने शासन-प्रशासन से राप्ती नदी द्वारा की जा रही कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।
इस संबंध में एसडीएम उतरौला रामहर्ष मौर्या ने बताया कि राप्ती नदी के तटवर्ती गांवों के निकट राप्ती नदी में हो रही कटान पर नजर रखी जा रही है। कटान रोकने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।