गोंडा। निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समय से हासिल करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई की रणनीति में बदलाव की तैयारी तेज कर दी है। अब बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी रोजाना सीखने की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी। विद्यालयों में पढ़ाई के 10 नए मानक लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के साथ गतिविधि आधारित शिक्षण और कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक कक्षाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बीएसए अमित कुमार सिंह ने शिक्षकों को नियमित अभ्यास, बच्चों की समझ का आकलन, कमियों की पहचान, उपचारात्मक शिक्षण, मौलिक साक्षरता एवं संख्या ज्ञान और लर्निंग ट्रैकिंग सहित 10 मानकों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।
जिले के सभी 16 बीआरसी में प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसमें बच्चों की प्रगति जानने के लिए प्रश्नोत्तरी, गतिविधि आधारित मूल्यांकन और अन्य सरल तरीकों के इस्तेमाल के तरीके बताए जाएंगे। इससे शिक्षक यह पता लगा सकेंगे कि कौन सा बच्चा किस विषय या कौशल में पीछे है। नियमित मूल्यांकन के आधार पर शिक्षण रणनीति में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। सीखने में पिछड़े बच्चों को चिह्नित कर उनके लिए विशेष शिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। ऐसे बच्चों को स्वतंत्र रूप से पढ़ने-लिखने के अधिक अवसर देने के साथ दैनिक जीवन की घटनाओं से जोड़कर पाठ योजनाएं तैयार की जाएंगी। नियमित अभ्यास और मूल्यांकन के आधार पर बच्चों की प्रगति दर्ज होगी। जरूरत के अनुसार दोबारा अभ्यास और अतिरिक्त शिक्षण कराया जाएगा।