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Ghazipur News: सैदपुर और मुहम्मदाबाद में ही चल रहा महिला अस्पताल

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जिले के ग्रामीण इलाकों में कहने को सात महिला अस्पताल है। सैदपुर और मुहम्मदाबाद में ही सिर्फ संचालन हो रहा है। जबकि पांच की स्थिति यह है कि कहीं जर्जर तो कहीं लंबे समय महिला रोग विशेषज्ञ तैनाती ही नहीं है। जबकि नर्स और वार्डबाॅय तैनात है, लेकिन प्रसव व अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं नदारद है। ऐसे में महिला मरीजों को निजी अस्पतालों के तरफ रुख करना पड़ता है, जहां अप्रशिक्षित चिकित्सकों से उपचार कराने पर जीवन बचाने का खतरा बना रहता है।
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महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करीब तीन से चार दशक पूर्व मुहम्मदाबाद, सैदपुर, दिलदारनगर, बरही, सादात, जमानिया और बहादुरगंज में महिला अस्पताल स्थापित किया गया था। कुछ दिन तक इन अस्पतालों में सामान्य प्रसव व महिला संबंधित अन्य चिकित्सकीय सुविधाएं मिल रही थीं, लेकिन जैसे ही सीएचसी, पीएचसी, स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित हुआ। इन महिला अस्पतालों पर विभाग ने ध्यान देना बंद कर दिया। वर्तमान समय में स्थिति तो यह है कि कहीं सिर्फ नाम का अस्पताल रह गया है तो कहीं अस्तित्व बचाने में जुटा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि मात्र दो सैदपुर और मुहम्मदाबाद में ही संचालन होता है। जबकि दिलदारनगर में जर्जर होकर अस्पताल बंद हो चुका है। वहीं बरही, सादात में सिर्फ कागजी कोरमपूर्ति ही हो रही है। जबकि जमानिया और बहादुरगंज में तो अस्पताल का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। सैदपुर में महिला अस्पताल में जहां आयुष महिला चिकित्सक तैनात हैं तो मुहम्मदाबाद में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। शेष पांच अस्पतालों दो दशकों से डॉक्टरों के पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में यहां की महिला मरीजों को जनपद मुख्यालय व निजी अस्पतालों के तरफ रूख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दंश झेलने को मरीज और तीमारदार विवश हैं। सीएओ डा. एसके पांडेय ने बताया कि तीन से चार जगहों पर महिला अस्पताल के भवन निष्प्रोज्य हो चुके हैं। उन्हें ध्वस्त कराने के लिए पत्र लिखा गया। जहां मरम्मत करा दी गई है, वहां संचालन हो रहा है। महिला विशेषज्ञों की तैनाती के लिए भी शासन को पत्र लिखा गया है।
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