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हमेशा याद आएंगे राहत इंदौरी

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दिलदानगर। मशहूर शायरी राहत इंदौरी के निधन पर साहित्यिक संस्था गुफ्तगू ने रकसहां में बुधवार को दुख जताते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया। संस्था के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि गुफ्तगू पत्रिका से उनका गहरा संबंध रहा है। अक्सर वे फोन करके इसके बारे में बात करते थे। उनके निधन से साहित्य जगत को जबरदस्त झटका लगा है, उनकी कमी किसी भी सूरत में पूरी नहीं की जा सकती।
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उन्होंने कहा कि चार दिन पहले ही एक किताब के सिलसिले में मोबाइल पर उनसे बात हुई थी। गुफ्तगू के अंक में छपे इंटरव्यू में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था ‘मुशायरे के स्तर में गिरावट की बड़ी वजह बाजार का हावी होना है। वहां पर भी क्वालिटी से समझौता हो रहा है। मुशायरों को तीसरे दर्जे के शायरों ने नुकसान पहुंचाया है। गैर जिम्मेदार शायर मुशायरों को चौपट कर देते हैं। शायरी बिना मेयार और सलीके के नहीं होती। मुशायरों में अच्छी शायरी पर जोर होना चाहिए। पूर्व डीजीपी मोहम्मद वजीर अंसारी ने कहा कि राहत इंदौरी मेरे खास दोस्तों में से थे, उनका निधन हो जाना मेरे लिए बहुत बड़ी व्यक्तिगत क्षति है। एसकेबीएम इंटर कॉलेज के मैनेजर गुलाम मजहर खान ने कहा कि मंच पर राहत इंदौरी का रहना ही कामयाब मुशायरों की गारंटी होती थी, आज उनका हमारे बीच से चले जाना बहुत बड़ी क्षति है, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। मास्टर शमशाद हुसैन खान ने कहा कि वर्तमान दौर में राहत इंदौरी जैसे शायरों की ही जरूरत थी, वो समय को भांपते हुए उसके मुताबिक शायरी करते थे। स्कूल के उप प्रबंधक शकील खान, मास्टर सुहैल खान, डॉ. वसीम रजा, मोहम्मद अजहर अंसारी, शाहनवाज अंसारी, औरगंजेब अंसारी, भोलू और मोहम्मद आजम खान ने भी खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
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