कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर गांव निवासी सेना के जवान की पठानकोट में पांच दिन पूर्व हुई मैराथन दौड़ प्रतियोगिता में तेज धूप और गर्मी के कारण तबीयत खराब हो गई थी। बुधवार की देर रात इलाज के दौरान दिल्ली के मिलिट्री हॉस्पिटल में मौत हो गई। घटना की जानकारी होते ही परिजनों के रोने-बिलखने से गांव में मातम पसर गया। इधर ग्रामीण परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।
जलालपुर गांव निवासी चंद्रभान यादव के पांच पुत्रों में सबसे छोटे पुत्र रामनिवास यादव (32) भारतीय थल सेना के 85 आर्म्ड रेजीमेंट सतवारी जम्मू में तैनात थे। वह अपने रेजिमेंट से पठानकोट में बीते 20 अगस्त को आयोजित होने वाले मैराथन दौड़ में भाग लेने के लिए गए थे। दौड़ सुबह छह बजे से होनी थी, लेकिन उच्चाधिकारियों के समय से न आने के कारण दौड़ सुबह 11. 00 बजे दिन में शुरू हुई। दौड़ में कुल 40 जवान विभिन्न रेजिमेंट से भाग ले रहे थे। रामनिवास यादव के बड़े भाई वीरेंद्र यादव ने बताया कि दौड़ के दौरान एक दर्जन से अधिक सैनिकों की तबीयत हीट स्ट्रोक के कारण ज्यादा खराब हो गई। वजह जिस समय दौड़ शुरू हुई थी, काफी गर्मी और तेज धूप थी। तबीयत खराब होने पर पठानकोट स्थित सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
22 अगस्त को रामनिवास की तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उसे आरआर सैनिक हॉस्पिटल दिल्ली में शिफ्ट किया गया, जहां उसका आईसीयू में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान 25 अगस्त की रात 10.15 बजे मृत्यु हो गई। तबीयत खराब होने की सूचना पर उनकी पत्नी पिंकी यादव और बड़े भाई भटिंडा में तैनात सेना के जवान रविंद्र यादव दिल्ली पहुंच गए थे। राम निवास की मौत की सूचना पर रविंद्र यादव ने ही अपने बड़े भाई विरेंद्र यादव को दी। इधर घटना की जानकारी होते ही परिजनों सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मृत सेना के जवान के माता-पिता का पूर्व में देहांत हो चुका है। उनके बड़े भाई बृजभूषण यादव और वीरेंद्र यादव घर पर ही रहकर खेती का काम करते हैं। जबकि दो भाई रविंद्र यादव और कमलेश यादव सेना में तैनात है। मृत जवान रामनिवास की पत्नी पिंकी यादव एक सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात हैं। इनके दो पुत्र विनय 12 साल और विनीत चार साल के हैं। परिजनों ने बताया कि सेना के जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से एंबुलेंस द्वारा शव पैतृक आवास 27 अगस्त तक आने की संभावना है।
छुट्टी लेकर जून में घर आए थे रामनिवास
कासिमाबाद। सेना के जवान रामनिवास यादव 10 जून को छुट्टी लेकर 25 दिन के लिए घर आए थे। वह बीते पांच जुलाई को अपने रेजिमेंट के लिए घर से निकले थे। रामनिवास यादव अपने सभी भाइयों में काफी मिलनसार और हंसमुख थे। वह दौड़ का में काफी पारंगत थे। यही कारण था कि उन्हें मैराथन दौड़ के लिए पठानकोट भेजा गया था।
एसडीएम ने भूमि आवंटित का दिया निर्देश
कासिमाबाद। कासिमाबाद एसडीएम भारतभार्गव, तहसीलदार विराग पांडेय भी जवान के गांव पहुंचे और परिजनों से घटना की जानकारी ली। एसडीएम ने सैनिक के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने से पहले साफ-सफाई कराने के लिए ग्राम प्रधान एवं सचिव को निर्देश दिया। साथ ही एसडीएम ने क्षेत्रीय लेखपाल और ग्राम प्रधान से ग्राम समाज की खाली भूमि के बारे में जानकारी लेते हुए सैनिक परिवार को आवंटन के लिए उपलब्ध कराने की बात कही।
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जांच कराकर कार्रवाई की मांग
कासिमबाद। मृत सेना के जवान रामनिवास के बड़े भाई वीरेंद्र यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मांग की है कि इस घटना की जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि 20 अगस्त को पठानकोट में दौड़ सुबह 6 बजे से आयोजित थी, लेकिन अधिकारियों के बिलंब से आने पर दौड़ 11 बजे दिन में शुरू हुई। इसके कारण तेज धूप और गर्मी से सभी दौड़ने वाले 40 सैनिकों की तबीयत खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि पांच सैनिकों की मौत भी तत्काल होने की बात बताई जा रही है, जो काफी चिंतनीय है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई होनी चाहिए।