नहर में पानी नहीं आने से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को गमर के सुरहा पंप कैनाल पर प्रदर्शन किया।
नहर में पानी न आने से नाराज किसान शुक्रवार को आवेश में आ गए तथा लघुडाल पम्प कैनाल सुरहा पर पहुंचकर किसानों ने प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया। उनका कहना था कि प्राइवेट कर्मी की मनमानी से लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे सैकड़ों बिगहा खेती पर संकट पैदा हो गया है।ब्लॉक क्षेत्र के सुरहा ग्रामसभा अंतर्गत लघुडाल पम्प कैनाल से पूरे सुरहा गांव की नहरों को पानी आपूर्ति की जाती है। प्राइवेट कर्मी की मनमर्जी के चलते करीब एक पखवारे से पम्प नहीं चलाए जाने से नहरें सूखी पड़ी हैं।
इससे करीब 654 बीघे कृषि योग्य भूमि पर संकट खड़ा हो गया है। गांव के ललित मोहन चौबे ने बताया कि शुरू में बीस केवीए क्षमता के मोटर से पानी निकाला जाता था लेकिन आज मोटर की क्षमता 67 केवीए होने के बाद भी वही जर्जर पाइप से पानी निकाला जाता है जिससे आधा से अधिक पानी नदी में ही गिरता रहता है। पूर्व प्रधान रामनिवास राम ने बताया कि इस पम्प कैनाल पर सरकारी कर्मचारी नियुक्त नहीं है। प्राइवेट कर्मी की ओर से पम्प का नियमित संचालित नहीं किया जाता जिससे नहर पिछले पन्द्रह दिनो से बंद है।
धान का बीज डालने के लिये किसानों की चिंता बढ़ गयी है। किसान तेजनारायण चौबे ने बताया कि पम्प कैनाल से पानी आपूर्ति के लिये बनाई गई नहर, कर्मचारियों के आवास, नहर की टंकी एवं दोनों फाटक सब जर्जर हो चुके हैं। टीपीएमओ न होने से बिजली की सप्लाई सीधे मोटर को दी जाती है जिससे मोटर जलने का खतरा रहता है। चकनाली का निर्माण न होने से पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता जिससे खेती प्रभावित होती है। गोपीचंद राम ने बताया कि प्राइवेट कर्मी को विभाग की तरफ से मानदेय भी मिलता है।
नहर में पानी छोड़ने के लिए कहने के बावजूद पानी नहीं छोड़ा जाता है। इससे इलाके के सैकड़ों बिगहा खेत सूख गए हैं। ग्राम प्रधान प्रद्युम्न चौबे ने बताया कि प्राइवेट कर्मी की लापरवाही की शिकायत कई बार से मिल रही है। विभागीय अधिकारियों को बंद नहर से सूख रही खेती के बारे में जानकारी दे दी गई है लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। प्रदर्शन करने वालों मे श्यामसुंदर चौबे, मारकंडेय चौबे, जोगेन्द्र चौधरी, जोखू यादव, बुलाकी चौधरी, गिरजा राम, साधू राम, छोटेलाल राम आदि मौजूद रहे।