सैदपुर नगर के शौचालयों और घरों का निकला हुआ गंदा पानी नालों के जरिए पतित पावनी गंगा में गिर कर उन्हें प्रतिदिन प्रदूषित कर रहा है। इस पर रोक लगाने की पहल अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में गंगा को एक और भगीरथ प्रयास की दरकार है। हाल यह है कि सीवर लाइन के सारे पाइपों को सार्वजनिक नालों से जोड़ दिया गया है। इस तरह के आठ नाले, जिनका गंदा व बदबूदार पानी 24 घंटे गिरने से गंगा प्रदूषित हो रही हैं।
चार वर्ष पूर्व तत्कालीन डीएम ने निरीक्षण के दौरान एसटीपी के लिए दो बीघा जमीन तलाशने का निर्देश दिया था। बावजूद स्थानीय प्रशासन इस मामले में तनिक भी गंभीर नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि पूरे नगर का फेंका गया टनों कचरा और आस पास के दुकानों का अवशेष नालों के जरिए गंगा में जा रहा है। बरसात के दिनों में गंगा का जलस्तर जब ऊपर उठ जाता है तो नालों का पानी उलटकर घरों में ही घुसने लगता है।
सैदपुर नगर में गंगा किनारे कुल आठ घाट हैं। इनमें रंग महल घाट, पकवा घाट, बूढ़े महादेव घाट व गायघाट, संघत घाट, मियां घाट, सुभाष घाट और जोहरगंज का कोल्हुवा घाट शामिल हैं। कहने को तो यह सभी घाट पक्के हैं। जहां नगर के लोग नित्य जाकर स्नान करते हैं, लेकिन इन सभी घाटों से महज 20 से 30 फुट की दूरी पर ही अलग-अलग आठ नाले भी बने हैं। जिनसे निकलकर पूरे कस्बे का बदबूदार पानी गंगा में प्रवेश कर उसे प्रदूषित कर रहा है। कचरा रोकने के लिए इन नालों में लगाई गई लोहे की जाली खुद ही कचरों से इतनी भर गई है कि उनमें पानी तक अटका पड़ा है।
0000000
इनसेट
भूमि अधिग्रहण नहीं होने से अधर में एसटीपी
मौधा। सैदपुर नगर क्षेत्र के सारे सीवेज को सीधे गंगा नदी में गिरने से रोकने के लिए चार साल पहले एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। काफी दिनों तक मामला जमीन नहीं मिलने के कारण अधर में लटक रहा। नगर पंचायत प्रशासन भी काफी प्रयास के बाद अभी तक जमीन नहीं ढूंढ पाया है।
कोट
जल्द ही जमीन सर्वे का काम पूरा कर लिया जाएगा। गंगा का प्रदूषण से बचाने के लिए सारे नालों पर जाली लगा दी गई है। जहां पानी फिल्टर होने के बाद ही गंगा में गिर रहा है। -आशुतोष त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, सैदपुर नगर पंचायत