शिवराय का पुरा एवं सेमरा में रविवार को भारी बारिश एवं कटान के चलते गांव में अफरा तफरी का माहौल रहा। लगभग 4 मंडा कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। पिछले 11 सितंबर को लगभग 48 घंटे हुए अचानक कटान से गांव में कोहराम मच गया था। उसी की पुनरावृत्ति के भय से किनारे के मकानों में रहने वाले लोग घरों को छोड़कर बाहर आ गए।
तीसरे पहर शुरू हुई वर्षा देर शाम तक जारी रही। इससे कटान के चलते मकान खाली कर सड़क पर अपना रिहाइशी सामान लेकर रह रहे लोगों को काफी असुविधा उठानी पडी। सेमरा में हरिशंकर यादव के मकान के पास लगभग 20 मीटर तक धंसे ठोकर को बचाने के लिये ग्रामीण पूरी मेहनत से लगे हुए हैं। गंगा पार से स्टीमर पर बालू की बोरियां डालकर कटान रोकने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अधिकारी भी ठोकर को बचाने के लिये बल्लियां लगाकर उसमें झाड़-झंखाड़ एवं बालू की बोरियां डालकर रोकने का प्रयास किया शुरू किया है लेकिन ग्रामीण सिंचाई विभाग के इस कवायद को नाकाफी मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ठोकर के निर्माण के समय अगर उनकी आपत्ति पर उच्चाधिकारियों ने ध्यान दिया होता और ठोकर निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता तो आज गांव को कटान के दंश से बचाया जा सकता था। जिलाधिकारी संजय खत्री ने कटान के निरीक्षण के बाद कटान से बेघर हुए लोगों को खाद्यान उपलब्ध कराने एवं गांव में जेनरेटर लगाकर प्रकाश की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था लेकिन चार-पांच दिन बीत जाने के बाद भी न तो पीड़ितों को खाद्यान मिला और न ही रात में प्रकाश की व्यवस्था की गई। वर्ष 2013 में कटान के चलते अपना आशियाना गंवा चुके लोग मातृ एवं शिशु कल्याण केन्द्र में एवं उसके पास झोपड़ी डालकर विस्थापन का जीवन बिता रहे हैं। कटान को देख बस्ती के लोग फिर से अपना आशियाना बनाने की फिराक में लगे हैं। शिवमुनी, जयप्रकाश, विरेंद्र राम, शिवनारायण, सुबाष राम, लालबिहारी राम,राधेश्याम, देउराम ने बताया कि उनके पास कोई निजी जमीन भी नहीं है कि वे कहीं जाकर बस सकें। अब तक सरकार की तरफ से भी कोई विस्थापित शिविर नहीं बनाया गया हैं जिसमें वे जाकर रह सकें।