गाजीपुर। करीब 15 साल के बाद दूधिया रोशनी से गंगा पर स्थित वीर अब्दुल हमीद सेतु रविवार की शाम जगमगा उठा। यह नजारा देखकर हर राहगीर कुछ देर के लिए ठहर गया। पल भर नजारा निहारने के बाद ही लोग गंतव्य के लिए रवाना हुए।
वीर अब्दुल हमीद सेतु डेढ़ दशक के बाद रोशन हुआ है। लगभग डेढ़ दशक बाद। लगभग सभी वर्ग के लोगों ने इसके लिए आवाज उठाई। किसी ने आंदोलन किया, तो किसी ने डीएम के समक्ष मुद्दे को उठाया। अंतत: लोगों की पहल रंग लाई और लंबे इंतजार के बाद वीर अब्दुल हमीद सेतु रोशन हो उठा। लगभग एक महीने से सेतु की खराब लाइटों को बदलने का कार्य किया जा रहा था। सेतु की पुरानी स्ट्रीट लाइटों को बदलकर सफेद रोशनी वाली 64 नई एलईडी लाइटों को लगाया गया है। 10 दिन पहले सेतु का एक हिस्सा रोशन हो उठा था। अब दोनों हिस्सा रोशनी से जगमगा रहा है। यह जनपद का महत्वपूर्ण सेतु है। बिहार को जोड़ने के साथ ही गंगा उस पार के दो तहसीलों के 80 गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने का कार्य सेतु करता है। सेतु 1100 मीटर लंबा है। वर्ष 1974 में इसकी आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के कार्यकाल में रखी गई थी। लगभग 10 वर्ष बाद 1984-85 में यह बनकर तैयार हुआ था। एनएचआई के परियोजना निदेशक प्रशांत मिश्रा ने बताया कि वीर अब्दुल हमीद सेतु की सभी खराब लाइटों को बदल दिया गया है।
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सेंसर युक्त हैं लाइटें, खुद जलेंगी और खुद ही बुझ जाएंगी
वीर अब्दुल हमीद सेतु पर लगाई गईं नई लाइटें खास हैं। इनमें सेंसर लगाया गया है। इससे फायदा यह होगा कि इनको जलाने व बुझाने के लिए किसी कर्मचारी की ड्यूटी लगाने की जरूरत नहीं है। शाम होते लाइटें खुद जल जाएंगी और सुबह स्वत: बुझ जाएंगी। सेतु का नामकरण परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के नाम पर किया गया है।