विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज हो रही प्राथमिकी यूपी कॉप पर 24 घंटे अपलोड होनी है। स्थिति यह है कि तीन दिन बाद भी यह ऑनलाइन नहीं दिखाई पड़ रही है। कई महत्वपूर्ण घटनाओं की एफआईआर चार से पांच दिन बाद दिखाई पड़ रही हैं।
हेडक्वार्टर से इसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती है। ऐसे में जिम्मेदार नेटवर्किंग व टेक्निकल फॉल्ट का हवाला देकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं। यूपीकॉप एप आमजनों की सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस विकसित किया है।
इससे पीड़ित घर बैठे ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कर सकता है। यहीं नहीं पुलिस से जुड़ी कई सुविधाएं जैसे चरित्र प्रमाण पत्र, वाहन सत्यापन, ई-चालान प्राप्त भी इसी एप के माध्यम से कर सकता है।
इससे उन्हें थानों के चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। इसके दुरुपयोग (ठगी) के मामले भी सामने आए हैं, जिसपर पुलिस सतर्कता बरत रही है। यहीं नहीं बड़े मामलों में लिखित रूप से पीड़ितों द्वारा दर्ज कराए गए एफआईआर के मामले में वह ऑनलाइन एफआईआर की काॅपी निकालकर देख सकते हैं कि उनके द्वारा क्या दर्ज कराया गया था और ऑनलाइन हुए एफआईआर कॉपी में क्या है।
बावजूद स्थिति यह है कि यहां एफआईआर की काॅपी आनलाइन देखने के लिए पीड़ितों को 24 घंटे नहीं करीब तीन से चार दिन का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इधर जिम्मेदारों द्वारा कभी नेटवर्किंग तो कभी टेक्निकल फॉल्ट का हवाला दे रहे हैं।
एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे के अंदर ऑनलाइन दिखाई देने लगता है। कभी- कभी टेक्निकल फॉल्ट और नेटवर्किंग के चलते समस्या आती है। इस पूरे मामले की उच्चाधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाती है। - डॉ. राकेश मिश्रा, एएसपी सिटी
केस एक...
नोनहरा थाना के पारा गांव में बीते नवंबर माह हुए मारपीट और तीन युवकों को पोल में बांधकर मारने पीटने के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के करीब तीन से चार दिन तक ऑनलाइन एफआईआर यूपी कॉप एप पर अपलोड नहीं थी। जबकि इस मामले में प्राथमिकी घटना के दिन ही देर रात तक दर्ज हो गई थी।
केस दो....
नोनहरा थाना क्षेत्र के चौरही प्राथमिक विद्यालय के पास एक किशोर को आरोपियों ने चाकू गोदकर बीते नवंबर माह में हत्या कर दी थी। मृतक के पिता की ओर से तहरीर देकर आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, लेकिन एफआईआर तीन से चार दिन बाद भी अपलोड नहीं थी।
केस तीन......
कासिमाबाद कोतवाली क्षेत्र एक गांव में नशीला पदार्थ खिलाकर अश्लील फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस ने पीड़िता की मां की तहरीर पर प्राथमिकी तो दर्ज कर ली लेकिन ऑनलाइन एफआईआर दिखने में कई घंटे लग गए।