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अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कसेगा शिकंजा

Sun, 08 Feb 2015 11:18 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
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बेटी बचाने की मुहिम में भ्रूण हत्या को पूरी तरह से बंद करने के लिए प्रदेश सरकार भी कड़ा रुख अख्तियार करने का मन बना चुकी है। इस कड़ी में भ्रूण हत्या करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों, नर्सिंगहोमों और चिकित्सकों के खिलाफ और  शिकंजा कसा जाएगा।
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इसकी गाइड   लाइन तय करने के लिए 10 फरवरी को महानिदेशक परिवार कल्याण लखनऊ ने प्रदेश के उन दस जिलों जहां वर्ष 2011 में 0 से 05 वर्ष तक के बच्चों की जनगणना में लिंगानुपात घटा हुआ   पाया गया है, वहां के नोडल अधिकारियों की अहम   बैठक बुलाई है। तय गाइड लाइन के हिसाब से आगे शिकंजा कसने की कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।


डिप्टी मुख्य चिकित्साधिकारी/ नोडल अधिकारी डा. एके जायसवाल का कहना है कि बेटी बचाने और भ्रूण हत्या बंद करने के लिए यह बैठक कई मायनों में अहम होगी। बैठक में तय गाइड लाइन के आधार पर आगे होने वाली कार्रवाई से भ्रूण हत्या करना आसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर एक हजार बालक पर 960 से 970 तक बालिकाएं होनी चाहिए। लिंगानुपात के लिहाज से वर्ष 2011 में की गई जनगणना की रिपोर्ट चिंतित करने वाली रही।
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रिपोर्ट के मुताबिक सूबे के दस जिलों बलिया, गाजीपुर, बहराइच, वाराणसी, सोनभद्र, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर, पीलीभीत, मिर्जापुर तथा महराजगंज में लिंगानुपात घटा हुआ पाया गया। बलिया में लिंगानुपात की दर में सबसे अधिक 42 अंक की गिरावट सामने आई जबकि पड़ोसी जनपद गाजीपुर में 26 अंक की गिरावट पाई गई। यानी जिन जिलों में लिंगानुपात की दर घटी, इसके पीछे भ्रूण हत्या को अहम कारण माना गया।


अब जब बेटी बचाओ की मुहिम को लेकर प्रदेश सरकार भी गंभीर हो गई है तो लिंगानुपात की घटती दर को रोकने लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण महकमा भी कड़ा कदम उठाने को मजबूर हो गया है।लिंगानुपात कम होने से स्वास्थ्य विभाग भी चितिंत है।  इसी कड़ी में शासन के निर्देश पर 10 फरवरी को लखनऊ में महानिदेशक परिवार कल्याण की ओर से अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में चिंतन के लिए जनपदों के नोडल अधिकारियों को विशेष तौर पर बुलाया गया  है। इन नोडल अधिकारियों से अप्रैल 2014 से अब तक जिले में पैदा हुए बालक और बालिकाओं की रिपोर्ट भी मंगवाई गई है।
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