शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित नेत्र रोग विभाग ओपीडी के बाहर नवजातों को लेकर
गाजीपुर। समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों की आंखों की रोशनी पर खतरा मंडरा रहा है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह आरओपी (रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी) से पीड़ित दो से तीन नवजात पहुंच रहे हैं।
स्क्रीनिंग में बीमारी की पुष्टि होने पर बच्चों को आरओपी सर्जरी के लिए बीएचयू, पीजीआई लखनऊ और एम्स नई दिल्ली रेफर किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में आंखों के पर्दे (रेटिना) की रक्त वाहिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती हैं। ऐसे बच्चों की 72 घंटे के अंदर स्क्रीनिंग कराना जरूरी है।
समय पर उपचार नहीं मिलने पर आगे चलकर आंखों में तिरछापन, बड़े नंबर का चश्मा लगने के साथ रोशनी तक जा सकती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. स्नेहा सिंह ने बताया कि 24 से 37 सप्ताह में जन्मे बच्चे, जन्म के बाद ऑक्सीजन लगाए गए बच्चे और जन्म के समय 1.5 किलोग्राम से कम वजन वाले नवजातों में आरओपी का खतरा रहता है।
विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह ऐसे दो-तीन बच्चे पहुंच रहे हैं। स्क्रीनिंग के दौरान आरओपी के लक्षण मिलने पर उन्हें तत्काल सर्जरी के लिए हायर सेंटर भेजा जाता है।