मंगलवार शेरपुर गांव के लिए अमंगल साबित हुआ। एकादशी पर स्नान के दौरान गंगा की गोद में एक-एक कर तीन जिंदगियां समा गईं। दो घरों के चिराग हमेशा-हमेशा के लिए बुझ गए। मां की आंखों में मौत का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। दिल दहलाने वाली घटना से पूरा गांव सन्नाटे में डूबा हुआ है।
हृदय विदारक घटना के बाद परिवार वालों के रूदन-क्रंदन सुन हर किसी की आंखों से खुद आंसू निकल जा रहे थे। बच्चों की मौत के बाद मां बेसुध पड़ी थी। मां की चीत्कार सुन वहां मौजूद लोग उसे सांत्वना देने में जुटे थे।
सुबह करीब छह बजे गंगा स्नान करने मुन्नू गुप्ता की पत्नी दीपा गुप्ता अपने बेटे मोहित और बेटी नंदनी और बहन के बेटे आयूष को साथ लेकर शेरपुर गंगाघाट गई थी। पहले वह नंदनी को लेकर स्नान के लिए जा रही थी, लेकिन मोहित और आयूष के जिद्द करने पर वह उन्हें भी साथ ले ली। गंगा स्नान के बाद सभी नदी से बाहर आ गए, तो मां नंदनी गुप्ता ने आयूष से डिब्बे में जल भरकर लाने को कहा।
जैसे ही आयूष गंगा नदी से डिब्बे में जल भरने के लिए उतरा वह गहरे पानी में डूबने लगा। अपने भाई को डूबता देख बचाने के लिए मोहित नदी में चला गया और वह भी डूबने लगा। दोनों को डूबते देख नंदनी उर्फ बेबी भी नदी के गहरे पानी तक चली गई। एक-दूसरे को बचाने के चक्कर में वह भी डूबने लगी।
तीनों बच्चों को डूबते देख मां दीपा गुप्ता भी शोर मचाते हुए नदी के गहरे पानी में चली गई। संयोग ही रहा कि उसी समय घाट पर पहुंचे लक्ष्मण राय ने दीपा को डूबते हुए देख लिया और उसे बाल पकड़कर किसी तरह पानी से बाहर निकाला। जिससे वह डूबने से बच गई। इस हृदय विदारक घटना की जानकारी होते ही ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
घाट पर बेसुध पड़ी मां दीप गुप्ता के रोने-बिलखने से हर किसी के आंखें भर जा रही थी। तटवर्ती मल्लाहों की मेहनत से किसी तरह दो घंटे बाद शवों को बाहर निकाला गया। शव देखते ही परिवार के सदस्य दहाड़े मारकर रोने लगे। मोहित गुप्ता और नंदनी उर्फ बेबी की मौत के बाद मां दीपा गुप्ता बेसुध पड़ी थी।
दीपा गुप्ता की यही दो संतान थी। जबकि दीपा की बहन ज्योति गुप्ता का बेटे आयूष गुप्ता भी उसकी एकलौती संतान था। बच्चों की मौत के साथ ही दोनों घरों के चिराग बुझ गए हैं और मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।