बाढ़ प्रभावित के कई गांवों में संक्रामक बीमारी का कहर टूटने लगा है। सुरनी और धनेठा गांव में एक दर्जन लोग संक्रामक बीमारी की चपेट में हैं। डायरिया की जद में आने से सोमवार को धनेठा गांव में एक वृद्ध और बालिका की मौत हो गई। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में रोष है।
ब्लाक के कई ऐसे गांव अभी भी बाढ़ के पीने से घिरे हुए हैं। एक तरफ जहां बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। वहीं संक्रामक बीमारियों ने लोगों को अपनी चपेट में लेकर काल का ग्रास बनाना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग बुखार, डायरिया, पीलिया जैसे खतरनाक बीमारियों से पूरी तरह से जकड़ गए हैं।
धनेठा गांव निवासी रामवृक्ष (65 वर्ष) और दिलीप राम की पुत्री पिंकी (7 वर्ष) कई दिनों से डायरिया से पीड़ित चल रही थी। बाढ़ के पानी से गांव के घिरे होने के कारण दोनों के परिजन उनका इलाज गांव के ही झोलाछाप चिकित्सकों से करा रहे थे।
दिलीप राम की सात वर्षीय पुत्री ने जहां इलाज के आभाव में शनिवार की रात दम तोड़ दिया। वहीं रामवृक्ष की मौत सोमवार की सुबह हो गई। इसके अलावा दिलीप राम के पुत्र विकास राम (8 वर्ष) और पुत्री मुन्नी (2 वर्ष) डायरिया से पीड़ित है। इनकी भी स्थिति चिंता जनक बनी हुई है।
वहीं सुरनी गांव में प्रीति (8 वर्ष), सुधा (6 वर्ष), चैंपियन (4 वर्ष), विशाल (11 वर्ष), कुणाल (3 वर्ष), कुशी (5 वर्ष), अंकित डेढ़ वर्ष, आशु (6 वर्ष), सोनम (14 वर्ष), मुनेश्वरी (70 वर्ष) संक्रामक बुखार से पीड़ित चल रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को इसकी जानकरी दी गई थी लेकिन अभी विभाग की ओर से टीम गांव में नहीं पहुंची है।
इस संबंध में एसीएमओ डॉ. आरके सिन्हा ने बताया कि दोनों गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जा रही है। गांवों में कैंप का आयोजन कर मरीजों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर उन्हें दवा उपलब्ध कराने का निर्देश संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को दे दिया गया है।