सड़क हादसे में घायल 12 महिलाएं दो घंटे तक भदौरा सामुदायिक केंद्र पर कराहती रहीं। अधीक्षक और फार्मासिस्ट के नदारद रहने पर एक चिकित्सक और स्वीपर घायलों को इंजेक्शन लगाने के साथ मरहम-पट्टी करते दिखा।
शिकायत करने पर अधीक्षक से बात करने के लिए सीएमओ लगातार फोन लगाते रहे लेकिन बात नहीं हो पाई। वह अधीक्षक की मनमानी के आगे लाचार दिखाई पड़े।
जनपद के अधिसंख्य डॉक्टर और स्वास्थ्यकमियों ने अपनी तैनाती गृह जनपद से सटे इलाकों के सीएचसी-पीएचसी पर करा रखी है। निर्धारित समय से पहुंचना तो दूर, वे आए दिन ड्यूटी से नदारद भी रहते हैं।
इसका उदाहरण शुक्रवार को उस समय देखने को मिला, जब सेवराई के गोड़सरा गांव की करीब 12 महिलाएं बाड़ क्षेत्र के खेतों में काम करने जा रही थीं। बसुका मोड़ पर दो ऑटो की टक्कर में गोड़सरा निवासी निर्मला (40) पत्नी छोटू राजभर, जितनी देवी (35) पत्नी परमेश्वर बिंद, सुमवती देवी (52) पत्नी सुखलाल राजभर, सीमादेवी (38) पत्नी सोनू बिंद, शिवकुमारी देवी (55) पत्नी शेषनाथ बिंद, मीना देवी (58) पत्नी स्व. रामजी राजभर, तेतरी देवी (60) पत्नी विजय खरवार, लक्ष्मीना देवी (35) पत्नी लोचन राजभर, मुन्नी देवी (50) पत्नी जगदीश बिंद, संगीता (17) पुत्री जगदीश बिंद, सिमरती देवी (40) पत्नी रामनरायन बिंद, अकबरिया (55) पत्नी नेनुआ बिंद घायल हो गई।
घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि घायलों को लेकर जब अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। दो घंटे तक घायल कराह रही थीं। चिकित्सक को बुलाने पर काफी देर बाद डॉ. अशोक मौके पर पहुंचे।
इसके बाद कहीं उनका इलाज शुरू हो पाया। इससे लोगों में रोष बना रहा। साथ ही सीएमओ से शिकायत करते हुए लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि प्रभारी अधीक्षक फोन नहीं उठा रहे हैं। अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से बात हुई है। मरीजों का प्राथमिक उपचार कराया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है।