आज देश में नफरत फैलाई जा रही है। यह देश कबीर, सूरदास, रसखान, गांधी, भगत सिंह, अशफाक, बिस्मिल के साथ डा. आंबेडकर और नेहरू के ख्वाबों में पला है। आजादी, बराबरी और जन संस्कृति की हिफाजत के साथ झूठ, नफरत और हिंसा के खिलाफ ही यात्रा निकाली गई है। यह बातें ढाई आखर प्रेम के सांस्कृतिक यात्रा के प्रमुख एवं इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश ने कहीं। सोमवार की देर शाम वे गंगौली स्थित डा. राही मासूम रजा के आवास पर उन्हें याद किया।
उन्होंने कहा कि आज एक-दूसरे को बांटा जा रहा है। इसीलिए इस यात्रा को लेकर हम लोग चले हैं। आज नफरत फैलाने वालों के खिलाफ आवाज उठाने वाले भले ही गिनती में कम हों लेकिन यह आवाज रुकेगी नहीं और लोगों के दिलों से नफरत समाप्त करके रहेगी। यह देश गंगा-जमुनी तहजीब का है। उन्होंने कहा कि जिसने इस देश को खड़ा किया, संवारा, सींचा है आज उसी पर सवाल किए जा रहे हैं। यात्रा सोमवार की सुबह वाराणसी के भारतेंदु भवन से प्रारंभ होकर भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान के आवास, जयशंकर प्रसाद के आवास, कबीरदास के मठ, प्रेमचंद के गांव के बाद डा. राही मासूम रजा के गांव गंगौली तक पहुंची। इसका समापन देर रात में राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ परिसर मऊ में किया जाएगा। यात्रा में अरविंद मूर्ति, अमेरिका सिंह यादव, शमीम अहमद, प्रीति जायसवाल, इरशाद अहमद, राजीव सिंह, सैयद आमिर हुसैन, सारिका कुशवाहा, जैगम अब्बास, विनोद जायसवाल आदि शामिल थे।