इसके बाद कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को उपहार देते हुए उनकी रक्षा का संकल्प लिया। घरों में सुबह से ही पर्व को लेकर उत्साह छाया रहा।
रक्षाबंधन पर्व को लेकर पिछले कई दिनों से बहनों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा था।
वे पर्व से संबंधित राखी सहित अन्य सामानों की खरीदारी में जुटी थी। पर्व की पूर्व संध्या पर देर रात तक बाजारों में खरीदारी के सिलसिले में चहल-पहल बनी रही। कई बहनें सुबह ही स्नान-ध्यान कर तैयार हो गई। इसके बाद भइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी और उनकी कलाई पर राखियां बांधी।
जबकि अधिकांश बहनों ने मुुर्हुत के अनुसार करीब पौने दो बजे के बाद भाइयों की कलाई पर अपने प्यार की डोर बांधी। राखी बंधवाने के बाद भाइयों ने बहनों को उपहार देने के साथ ही उनकी रक्षा का संकल्प लिया। सुबह से लेकर शाम तक राखी बंधवाने का क्रम चलता रहा।
नन्हे-मुन्ने भाई-बहनों की खुशी देखते ही बन रही थी। नन्हीं कलाइयों पर राखी बांधने के बाद छोटी बहनों ने
भैया राजा का मुंह मीठा कराने के साथ उनका दुलार किया। सबसे ज्यादा उत्साह उन छोटी बहनों में था, जो पहली बार अपने भाई को राखी बांध रही थी। पर्व के चलते शहर में बंदी जैसी स्थिति रही।
अगर मार्ग पर कोई दिखाई दे रहा था, वह थी भाइयों को राखी बांधने के लिए आने-जाने वाली बहनें। कासिमाबाद, सिधागरघाट, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, ताजपुर डेहमा, दुबिहा, मुहम्मदाबाद, गहमर, भदौरा, दिलदारनगर, जमानिया, मतसा, सुहवल, खानपुर, सैदपुर, सादात, भीमापार, बहरियाबाद, शादियाबाद, दुल्लहपुर, नंदगंज, देवकली, जखनिया, मरदह, बिरनो, करंडा, जंगीपुर, करंडा संवाददाताओं के अनुसार क्षेत्रों में रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
बहनों ने राखी दूकानों से राखी खरीदने के बाद मिठाई की खरीदादारी की। इसके बाद थाली में चंदन, रोरी, चावल मिठाई सजाकर भइया राजा की आरती उतारी और उनकी कलाई पर प्यार के रूप में रेशम की डोर बांधी और मुंह मीठा कराकर भाइयों से आशीर्वाद लिया। भाइयों ने अपनी बहनों को उपहार दिया।