जिले में केले की खेती का रकबा सिकुड़ता जा रहा है। बीते वर्ष जहां 150 हेक्टेयर में केले की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस बार मात्र 45 हेक्टेयर में ही केले की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खेती का लक्ष्य घटने से अब इस की सफल खेती को लेकर खतरा मंडराता दिख रहा है। हालांकि किसान उद्यान विभाग से बिना अनुदान अथवा कोई सहायता के केले की खेती करने में जुटे हुए हैं। खासकर रेवतीपुर ब्लाक में वर्तमान समय में बड़े पैमाने पर किसानों ने केले की खेती की है।
अधिकांश किसान परंपरागत खेती छोड़ कर अत्याधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। जिले में किसान केला की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। बीते साल 110 सामान्य एवं 40 हेक्टेयर अनुसूचित जाति के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस वर्ष शासन ने केला की खेती का रकबा 105 हेक्टेयर कम कर 35 सामान्य एवं 10 अनुसूचित के लिए हेक्टेयर कर दिया है। केले की खेती का रकबा घटने से किसानों को शासन से मिलने वाले अनुदान से वंचित रह जाएंगे। केले की खेती को लेकर इस क्षेत्र के किसान जागरूक भी है। क्षेत्र के किसानों का मानना है कि उद्यान विभाग जो लक्ष्य निर्धारित करती है उससे क्षेत्र के सभी किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। उद्यान विभाग किसानों को योजना का लाभ पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर देगा। विभाग के मुताबिक केले की एक हेक्टेयर खेती करने पर कुल 102462 रुपये खर्च आता है। इसकी 40 प्रतिशत धनराशि किसानों को अनुदान के रूप में मिलती है। अनुदान की धनराशि दो किस्तों में डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में जाती है। बीते वर्ष की अपेक्षा खेती का रकबा जरूर कम हुआ है, लेकिन किसानों की संख्या बढ़ी है। जिले में कुल 100 से अधिक किसान केला की खेती करते हैं। इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी शैलेंद्र दुबे ने बताया कि शासन ने 45 हेक्टेयर में केला की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों को केला की खेती करने के लिए अनुदान भी दिया जाता है। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किसानों का चयन होगा।
बिना कोई सरकारी अनुदान के ही करते हैं केले की खेती
गाजीपुर। जिले रेवतीपुर ब्लाक के लगभग 50 से अधिक किसान केले की खेती बिना सरकारी अनुदान के कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। स्थिति यह है कि इस बार इस क्षेत्र के करीब 400 बीघा में केले में खेती की गई है। किसानों ने बताया कि इसकी खेती से किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं। व्यापारी स्वयं ही खेतों पर पहुंचकर इसकी खरीदारी कर ले जाते हैं। अधिकांश किसान बंटाई पर खेत लेकर इसकी खेती करके मुनाफा कमा रहे हैं।
परंपरागत खेती छोड़ कर तकरीबन 60 बीघा में केले की खेती की जाती है। इससे अच्छी आमदनी होती है। केले की खेती के लिए उद्यान विभाग से कई बार अनुदान भी मिलता रहता है। यह खेती काफी लाभकारी है।- प्रदीप कुमार राय, रेवतीपुर।
कई वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं। कई बार अनुदान के लिए आवेदन भी किया पर आज तक उद्यान विभाग द्वारा कोई अनुदान नहीं मिला। बावजूद केले की खेती की जाती है, इससे मुनाफा अच्छा होता है। - मोनू राय, रेवतीपुर।