बहरियाबाद बाजार में चहल्लुम के जुलूस में खेताब फरमाते मौलाना मीसम अब्बास। संवाद
बहरियाबाद। पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नाती हजरत इमाम हुसैन और उनके जांनिसार साथियों की शहादत को चहल्लुम के अवसर पर सोमवार को नम आंखो से याद किया गया।
मजलिसें आयोजित की गई, ताजिया एवं अलम के साथ जुलूस निकाला गया। विभिन्न अंजुमनों के लोगों की ओर से मातम नौहाख्वानी एवं सीनाजनी की गई। अंत में जुलूस देर शाम कर्बला पहुंचा और नौहाख्वानी की गई।
स्थानीय कस्बा स्थिति मुंतजिर इमाम के आवास पर सोमवार को मजलिस आयोजित की गई जिसे मौलाना बदरुल हसन ने खेताब फरमाते हुए कहा कि इमाम ने अपने साथ ही कुनबे की कुर्बानी कुबूल की लेकिन यजीद की बैयत कुबूल न की। आज कुछ लोग मुसलमानों की मुशाबहत लेकर इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि इस्लाम में दहशतगर्दी के लिए कोई जगह नहीं है।
इसके बाद ताजिया और अलम के साथ जुलूस निकाला गया जो दक्षिण से उत्तर मुहल्ला पहुंचा जहां ऐनुलवरा के सहन में मौलाना असगर अली ने मसाएबे-शोहदाए कर्बला बयान किया।
जुलूस पुनः बाजार में पहुंचा और शमशाद अहमद एवं आफताब आलम के सहन में जुलूस को खेताब फरमाते हुए मौलाना मीसम अब्बास ने कहा कि जुल्मो-जब्र का डटकर विरोध करें।