गंगा की लहरों ने एक मां की गोद को सूनी कर दी। पत्नी का सुहाग उजड़ गया। सेमरा गांव के एक परिवार पर शुक्रवार के दिन ऐसा दुखों का पहाड़ टूटा की वो ताउम्र नहीं भरेगा। ननिहाल के लोगों का ही नहीं ऐसे हादसे ने गांव के लोगों का भी कलेजा दहला कर रख दिया। रोने- बिलखने से मातमी सन्नाटा पसर गया।
मऊ जनपद के गोहना मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के सुरहूरपुर गांव निवासी प्रवीण तिवारी के पुत्र अंकित और पुत्र सारिका उर्फ तन्नू ननिहाल सेमरा गांव निवासी धर्मेंद्र उपाध्याय के यहां ही रहकर पढ़ाई करते थे। अंकित जहां कक्षा दस का छात्र था, वहीं बहन सारिका कक्षा 12 की छात्रा थी। पिता प्रवीण तिवारी और माता पूनम तिवारी दिल्ली रहते थे। पढ़ने में काफी होनहार अंकित और सारिका के गंगा की लहरों में समा जाने का दर्द मामा धर्मेंद्र के आंखों के बहते आंसू से साफ झलक रहा था। गांव के लोग भी दोनों से घुलमिल गए थे। ऐसे में इस हादसे ने ग्रामीणों को झकझोर दिया था। दोनों मौसा जयसिंह शर्मा और मौसरे भाई ओम शर्मा और मौसेरी बहन प्रिया तिवारी के साथ गंगा स्नान के लिए उत्साह के साथ गए थे। मौसरे भाई ओम शर्मा और मौसा जय सिंह को डूबता देख अंकित और सारिका बचाने का प्रयास करने लगी, लेकिन गंगा की लहरों ने उन्हें भी समा लिया। इधर मौसेरी बहन प्रिया तिवारी भी बचाने का प्रयास करने में डूबने लगी थी, लेकिन ग्रामीणों ने उसे बचा लिया। इधर जयसिंह शर्मा और ओम शर्मा के डूबने की खबर से पत्नी अपने छोटे पुत्र हरी शर्मा को गोद में लेकर दहाड़े मारकर बिलखने लगी। वहीं ननिहाल के लोग और ग्रामीण गंगा घाट की तरफ दौड़ पड़े। रोने- बिलखने से सिर्फ चित्कार की आवाज सुनाई दे रही थी। लोगों की नजर सिर्फ गंगा घाट के किनारे जा टिकी। वहां मौजूद हर कोई डूबे लोगों की तलाश करने लगा। घंटों मशक्कत के बाद जब मल्लाहों ने अंकित का शव पानी से बाहर निकाला तो परिवार की महिलाएं बिलख पड़ीं। गांव के लोगों ईश्वर के इस खेल और इतने बड़े हादसे को सोच कांप उठ रहे थे। इधर पुलिस ने अंकित का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जबकि डूबे तीन लोगों की तलाश देर शाम तक चलती रही। ग्रामीण भी देर शाम तक गंगा घाट पर जमे रहे।