गाजीपुर। गाजीपुर की पहचान वैसे भी लहुरी काशी के रूप में होती है। यहां भी शहर के किनारे से गुजरी मोक्षदायिनी गंगा के घाटों पर खड़े होने पर बनारस के घाटों जैसी अनुभूति होती है। अब यह जल्द ही हकीकत में तब्दील होता नजर आएगा।
यहां की पहचान भी वाराणसी के ठाठ-बाट वाले घाटों की तरह ही नजर आएंगे। इसके लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा भी कर दी है। उन्होंने गंगा के किनारे स्थित कलक्टर और चीतनाथ घाट के बीच कॉरिडोर बनाने के लिए अधिकारियों से डीपीआर बनाने को कहा है।
शहर से गुजरी गंगा के किनारे छोटे-बड़े करीब 15 घाट हैं। इनमें अधिकतर घाटों की अपनी अलग पहचान है। देव दीपावली, छठ और स्नान पर्व पर यहां भी भीड़ होती है।
देव दीपावली के मौके पर तो कलक्टर घाट से लेकर चीतनाथ घाट तक अलग ही छटा देखने को मिलती है। कलक्टर घाट पर खड़े होने पर बनारस के असि घाट की याद आती है। यहां सैर सपाटे के लिए पर्याप्त जगह है। यहां खड़े होकर वीर अब्दुल हमीद सेतु की तरफ देखने पर बनारस के दशाश्वेध, मर्णिकर्णिका घाट और राजघाट की अनुभूति होती है।
वजह चीतनाथ घाट पर हर सप्ताह सोमवार की शाम मोक्षदायिनी मां गंगा फाउंडेशन की ओर से काशी के दशाश्वेध की तर्ज पर कराई जाती है।
वहीं, आगे देखने पर बैकुंठ धाम (श्मशान घाट) तो उसके आगे वीर अब्दुल हमीद सेतु और उसके बगल रेल सह ओवरब्रिज का निर्माण किया गया है, जो दूर देखने पर मर्णिकर्णिका और राज घाट जैसा महसूस होता है।
अब मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र को अलग पहचान दिलाने की शुरूआत कर दी है। उन्होंने कलक्टर घाट से लेकर चीतनाथ घाट तक कॉरिडोर बनाने की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि इसके लिए डीपीआर बनाने तक को कहा है।