शेखनपुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी-स्रोत-संगठन
गंगौली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में वरिष्ठ कवि यशवंत सिंह यश के शेखनपुर स्थित आवास पर सोमवार की शाम काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण, जीवन के संघर्ष, मानवीय संवेदनाओं और प्रेम की महत्ता को स्वर दिया। इस दौरान युवा गजलकार गोपाल गौरव ने खुश्बुए शेर से महक जाए जहां, तुम गजल में जरा रातरानी लिखो सुनाकर वाहवाही बटोरी।
मुख्य अतिथि जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा के भूतपूर्व कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान विसंगतिपूर्ण समय में साहित्य का दायित्व और बढ़ गया है। साहित्य को सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ मानवीय मूल्यों के संरक्षण की भूमिका निभानी होगी। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि यशवंत सिंह यश ने की। संचालन नवगीतकार डॉ. अक्षय पाण्डेय ने किया।
काव्य पाठ की शुरुआत महाकवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी-वंदना से हुई। वरिष्ठ गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने जीवन के असमंजस को रचना के जरिये सामने रखा। डॉ. अक्षय पाण्डेय ने लोकतंत्र के बदलते स्वरूप पर केंद्रित नवगीत प्रस्तुत किया। उमाशंकर पथिक ने जीवन-संघर्ष और साधना को स्वर दिया।
कामेश्वर द्विवेदी ने प्रेम को अंतःप्रकाश का आधार बताते हुए रचना सुनाई। इस दौरान वीरवंत सिंह, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. राजेश सहित साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। संवाद