कुछ सप्ताह पहले जलस्तर बढ़ने एवं उसके पानी घटने के बाद नदी के किनारे बसे लोगों ने राहत की सांस ली थी लेकिन दो दिन से फिर गंगा उफनाने लगी हैं। इसके चलते इन लोगों की धुकधुकी फिर से बढ़ गई है। खेती के साथ ही कटान से होने वाली बर्बादी को याद कर लोगों के माथे पर बल पड़ने लगा है। दो सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से गंगा के जलस्तर में वृद्धि क्रम बना रहा। बीते नौ जुलाई से गंगा के जलस्तर में बढ़ाव का जो क्रम शुरु हुआ था, वह लगातार कई दिनों तक जारी रहा। पानी के बढ़ाव का आलम यह था कि गंगा खतरे के निशान के काफी करीब आ गई थी।
पानी बढ़ने से तटवर्ती इलाकों के किसानों के फसलें डूबकर बर्बाद हो गई थी। बाद में पानी घटने पर तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन शनिवार की रात से एक बार फिर से गंगा के जलस्तर में वृद्धि शुरू होने से तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों के माथे पर एक बार फिर से बल पड़ने लगा। दूसरे दिन सोमवार को भी गंगा जलस्तर में बढ़ाव का क्रम बना रहा। उधर गंगा में निरंतर बढ़ाव से तटवर्ती लोगों की धुकधुकी बढ़ गई है। बढ़ाव से लोगों को बाढ़ का खतरा मंडराने लग रहा है।