गाजीपुर में गंगा के बाढ़ से जनपद में करीब 230 बीघा फसल जलमग्न हो गई। ज्वार, बाजरा, चरी से लेकर सब्जी की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। सैदपुर, सेवराई, मुहम्मदाबाद व जमानिया तहसील में फसलें बाढ़ के पानी में समा रही हैं।
भांवरकोल व गहमर क्षेत्र में छह मंडा भूमि गंगा में समाहित हो गई। शहर में घाटों से गंगा में गिरने वाले नालों में पानी भरने लगा है। पानी बढ़ता रहा तो 24 से 38 घंटे में शहर के नालों में ओवरफ्लो की स्थिति हो जाएगी। वहीं गंगा का जलस्तर शाम पांच बजे 61.890 मीटर दर्ज किया गया। गंगा में प्रति घंटे दो सेमी की रफ्तार से बढ़ाव हो रहा है।
शहर के 15 गंगा घाटों की अधिकांश सीढ़ियां जलमग्न हो चुकी हैं। एक-दो सीढ़ियां ही शेष रह गई हैं। इनमें खिड़की घाट, पोस्ता घाट, अंजनी घाट, रामघाट, चीतनाथ, गोलाघाट, रामेश्वर घाट, ददरीघाट आदि गंगा घाट शामिल हैं।
इन गंगा घाटों से शहर का पानी नालों के माध्यम से गंगा में गिरता है। जलस्तर बढ़ने के कारण धीरे-धीरे गंगा पानी इनमें भरने लगा है। इसी तरह डीएम आवास के नाले में भी भराव की स्थिति उत्पन्न होने लगी है। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 61.690 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटे गंगा दो सेमी की रफ्तार से बढ़ाव पर थीं। सुबह 11 बजे 61.770 मीटर दर्ज किया गया। पांच घंटे में दो सेमी की रफ्तार से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा था।
बाढ़ पीड़ित किसानों का कहना है कि अभी फिलहाल भूसे से मवेशियों का भरण-पोषण चल रहा है। भूसा खत्म होने के बाद मवेशियों के लिए भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि चरी बाढ़ में बर्बाद होती चली जा रही है। उधर, गहमर के नरवा गंगा घाट के पास जारी कटान से दो मंडा भूमि गंगा में समाहित हो गई।
नगदीलपुर में खेत में बाढ़ का पानी आने के बाद परवल तुड़ाई करते किसान। संवाद