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Ghazipur News: सांसद आदर्श गांव कागजों में बने मॉडल, हकीकत में बदहाल

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रेहटी मालीपुर गांव को जाने वाली बदहाल सड़क। संवाद
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गाजीपुर। गांवों की स्थिति सुधारने के लिए 2014 में केंद्र सरकार ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। जिले में इस योजना के तहत छह विकास खंडों की दस ग्राम पंचायतों को सांसद आदर्श गांव के रूप में चयनित किया गया। सरकार की ओर से इन गांवों के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत में यह गांव सामान्य गांव से भी बदहाल हैं। वहीं जिला प्रशासन ने अभिलेखों में जनवरी 2025 में ही इन गांवों को संतृप्त घोषित कर दिया है।
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उद्देश्य था कि गांवों को सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त करते हुए वाई-फाई, पुस्तकालय, सोलर लाइट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना। यह योजना वर्ष 2023 तक चली। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने जब बुधवार को करीब पांच सांसद आदर्श गांवों की पड़ताल की, तो प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई। अधिकांश गांवों में आज भी सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं।
केस 1: रेहटी मालीपुर, जखनिया
2019-20 में जखनिया तहसील के रेहटी मालीपुर गांव को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया था। तब करीब 6 हजार की आबादी वाले गांव के लोगों को उम्मीद थी कि गांव की सूरत बदलेगी, लेकिन आज भी हालात जस के तस हैं। ग्रामीण शकुंतला देवी बताती हैं कि चुनावी दौर में बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सड़क, पानी, स्वच्छता और शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। राधेश्याम प्रजापति और सोनू कुमार का कहना है कि गांव में कहीं खड़ंजा नहीं है, सड़कें टूटी पड़ी हैं। सामुदायिक शौचालय बना जरूर, लेकिन उसका संचालन कभी शुरू नहीं हुआ।
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केस -2: डेढ़गांवा, रेवतीपुर ब्लॉक
2015-16 करीब 6000 की आबादी और लगभग 3600 मतदाताओं वाले डेढ़गांवा गांव को दस साल पहले सांसद आदर्श गांव चुना गया था, ग्रामीण हरिपाल राय के अनुसार गांव में न तो डाकघर है और न ही पानी की टंकी। पेयजल आपूर्ति की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और साधन सहकारी समिति का भवन खंडहर बन चुका है। प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर है और कभी भी गिर सकता आंगनबाड़ी केंद्र तक गांव में नहीं है।
केस -3: दुल्लहपुर शंकर सिंह, जखनिया

2014-15 में जखनिया तहसील का दुल्लहपुर शंकर सिंह गांव सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया था। ग्रामीण संजीत प्रजापति ने बताया कि गांव में रेलवे मैदान में केवल दो सुलभ शौचालय बनाए गए। प्राथमिक विद्यालय परिसर में स्मार्ट पोल, आरओ प्लांट, पानी की टंकी, 72 स्ट्रीट लाइट और कुछ सोलर लाइटें लगाई गईं, लेकिन ये सुविधाएं आम लोगों के किसी काम नहीं आ सकीं। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये की लागत से लगाए गए स्मार्ट पोल से न फ्री वाई-फाई मिला और न ही कोई अन्य सुविधा। करीब 24 लाख से लगाया गया अत्याधुनिक आरओ प्लांट भी बंद पड़ा है। ग्राम प्रधान हरिओम मद्धेशिया कहते हैं कि अधिकांश योजनाएं कागजों तक ही सीमित रहीं।
केस -4:देवा, जखनिया
खनिया विकासखंड के अंतर्गत स्थित देवा गांव, जो किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती का पैतृक गांव है, लेकिन आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। वर्ष 2015 में जब इस गांव को सांसद आदर्श गांव घोषित किया गया था। अखिलेश मिश्रा ने बताया कि देवा गांव में लगभग 7,000 की आबादी और करीब 3,000 मतदाता हैं। ग्राम प्रधान दीपक चौरसिया के अनुसार, आदर्श गांव घोषित होने के बाद कुछ कार्य हुए। इसके अलावा ठोस और स्थायी विकास कार्य अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सके। किसानों के मसीहा स्वामी सहजानंद सरस्वती से जुड़ी 12 बीघा पोखरी का जीर्णोद्धार, स्वामी जी के नाम पर पुस्तकालय और लाइब्रेरी की स्थापना जैसी योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पाईं।
केस -5: करहिया, भदौरा
भदौरा ब्लाॅक के करहिया गांव को वर्ष 2018-19 में सांसद आदर्श गांव के रूप में चयन किए जाने के बाद आदर्श गांव की परिकल्पना कागजों में सिमटकर रह गई है। ग्रामीण राकेश सिंह, नचक सिंह आदि का कहना है कि गांव में आज भी नल-जल व्यवस्था, नालियों का निर्माण, पोखरे का सौंदर्यीकरण, आरसीसी सड़कें, अस्पताल, मैरेज हाल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। युवाओं को आज तक फ्री वाई-फाई जैसी सुविधाएं नहीं मिल पाईं, जिससे वे शिक्षा और तकनीक से जुड़ सकें। वहीं, खंड विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि सांसद आदर्श गांव योजना के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों का पूरा लेखा-जोखा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जल्द ही संबंधित विवरण मंगवाकर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

सांसद आदर्श गांव में लगभग 23 विभागों को अपने-अपने बजट से विकास कार्य कराने होते हैं। जो विभाग अपना कार्य पूरा कर लेता है, उसी आधार पर गांव को संतृप्त मान लिया जाता है। - दीनदयाल, परियोजना निदेशक, गाजीपुर।
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