गाजीपुर। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव गणपतराव जाधव ने डीएम अविनाश कुमार को फोन करके नंदगंज के नौसारे में हुए हादसे में घायल महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों का हाल जाना। साथ ही घायलों को बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का दिशा- निर्देश दिया। इस दौरान डीएम अविनाश कुमार ने उन्हें जानकारी दी कि घायलों को बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। लगातार घायलों के स्वास्थ्य पर नजर भी रखी जा रही है।
चालक की लापरवाही से डिवाइडर पर चढ़कर पलटी बस : एएसपी सिटी
गाजीपुर। एएसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया महाराष्ट्र के तीर्थयात्रियों को लेकर एक बस कठमांडू से जनकपुर बिहार होते वाराणसी जा रही थी। इसमें तेज गति से चल रही बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराकर कई बार पलटी खाकर दूसरे साइड में जाकर खड़ी हो गई थी। हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई थी। घायलों का उपचार चल रहा है। इसमें बात आ रही थी कि किसी व्यक्ति द्वारा पत्थर चलाया गया था, इसकी पूरी जांच की गई है। चालक ने बताया और सीसीटीवी फुटेज देखने के साथ यात्रियों से बात करने पर यह तथ्य सामने आए हैं कि ऐसी कोई बात नहीं है। यह बात असत्य है। पिछले 25 से 26 घंटे से लगातार बस चल रही थी। चालक लगातार बस को चला रहा था। बस की गति तेज थी और चालक के लापरवाही के कारण बस डिवाइडर पर चढ़ गई और पलट गई।
बस का दरवाजा उखड़ गया था, बिखरे थे जूते-चप्पल
गाजीपुर/नंदगंज। वाराणसी- गोरखपुर फोरलेन नौसारे गांव के पास सड़क पर बिखरे जूता, चप्पल, टूटा बस का दरवाला और बिखरे पड़े शीशे से हादसे की भयावहता साफ झलक रही थी। इधर, अपनों की तलाश में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आए तीर्थयात्रियों के कपड़ों पर खून के धब्बे हादसे की कहानी बयां कर रहे थे। आईसीयू और सर्जरी वार्ड में भर्ती घायलों के उपचार को लेकर डॉक्टरों की टीम जुटी हुई थी। सुबह करीब 11 बजे जैसे ही बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली। एडीएम दिनेश कुमार, एएसपी सिटी डॉ राकेश मिश्र, सीएमओ डा. एसके पांडेय, प्राचार्य प्रोफेसर आनंद मिश्रा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आपातकक्ष में पहुंच गए। जैसे ही एंबुलेंस पहुंचती घायलों को उताकर स्वास्थ्य कर्मी स्ट्रेचर से सीधे आपातकक्ष में पहुंचा रहे थे। जहां डॉक्टरों द्वारा तत्काल उपचार किया जा रहा था। यहीं नहीं प्रत्येक घायलों का पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से जांच कर उपचार किया जा रहा था।
इसके बाद एक- एक करके घायलों को अस्पताल के दूसरे तल पर आईसीयू व सर्जरी वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा था। वहीं प्रोफेसर स्वंतत्र सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों की निगरानी करने के साथ उनके उपचार में जुटी हुई थी। इधर, घायलों के परिजन भी उनकी तलाश करते अस्पताल पहुंच गए थे, राहत बचाव के दौरान उनके कपड़ों पर लगे खून के धब्बे हादसे की कहानी को बयां कर रहे थे। मोबाइल की घंटी बजते ही बिलख रहे थे परिजन : मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजन उन्हें देख बिलख पड़ रहे थे। इधर, घर से शुभचिंतकों व परिजनों के मोबाइल पर फोन आ रहे थे। घायलों का कुशलक्षेम की जानकारी लेने में हर कोई परेशान दिखाई पड़ रहा था। संवाद