असल उत्तर और अब्दुल हमीद की वीरता एक-दूसरे के पर्याय
1965 की जंग में असल उत्तर की लड़ाई ने पाकिस्तानी सेना के टैंकों के अभेद्य होने के दावे को तोड़ दिया था। इसी युद्ध में अब्दुल हमीद और उनके साथियों ने पैटन टैंकों के खिलाफ मोर्चा संभाला। यही वजह है कि असल उत्तर का नाम लेते ही वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा याद आती है।
अखबार की खबर से मिली थी शहादत की सूचना
वीर अब्दुल हमीद की शहादत की खबर परिवार तक भी तत्काल नहीं पहुंच सकी थी। उनके पौत्र जमील आलम के अनुसार, 19 सितंबर 1965 को अखबार में प्रकाशित खबर के माध्यम से परिवार को उनकी शहादत की जानकारी मिली थी। खबर पढ़कर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए थे। उनकी पत्नी रसूलन बीवी भी यह समझते ही बुरी तरह रो पड़ी थीं। आज भी धामूपुर ही नहीं, पूरा देश उनकी शहादत पर गर्व करता है।
आज शहीद की धरती पर जुटेंगे देशभर के वीरता-प्रेमी
61वें बलिदान दिवस का आयोजन इस बार विशेष महत्व रखता है। शहीद अब्दुल हमीद की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम के साथ ही 21 परमवीर चक्र विजेताओं की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक का शिलान्यास होगा। कार्यक्रम में क्षेत्रीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रशासन और पुलिस स्तर पर भी तैयारी की जा रही है। शहीद के पौत्र एवं द लीजेंड वीर अब्दुल हमीद ट्रस्ट के अध्यक्ष जमील आलम ने कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम के संरक्षक शहीद वीर अब्दुल हमीद के पुत्र जुनेद आलम हैं। केंद्रीय मंत्रियों के आगमन को लेकर सुरक्षा और प्रोटोकॉल संबंधी जानकारी दुल्लहपुर थानाध्यक्ष दीपक कुमार की ओर से दी गई है।