दिलदारनगर भारतीय अवाम पार्टी की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गुमनाम सिपाहियों की खोज के लिए चौखट प्रणाम अभियान की टीम मंगलवार की शाम मिर्चा गांव पहुंची। वहां उन्होंने कैप्टन अब्दुल गनी के वयोवृद्ध पुत्र अब्दुल कादिर खां को सुभाष टोपी पहना कर सम्मानित किया।
भारतीय अवाम पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कुंवर नसीम रजा खां ने बताया कि कैप्टन अब्दुल गनी के बारे में पता चला। पुत्र अब्दुल कादिर खां पिता की गुमनामी की दास्तां सुनाते हुए फफक पड़े। 1940 में ही गाजीपुर में फारवर्ड ब्लाक की शाखा बनी। नेता जी सुभाषचंद्र बोस कोलकता से गाजीपुर में आए। उनका जोशीला भाषण सुनकर जिले के सैकड़ों युवक आजाद हिद फौज में शामिल हो गए थे। नेताजी के साथ देश को आजाद कराने के लिए जीवन को दांव पर लगाने वाले अब्दुल गनी खां अंतिम समय तक नेताजी के साथ रहे।
कैप्टन गनी जब गिरफ्तार नहीं हुए तो अंग्रेजी खुफिया एजेंसियों ने खोजबीन शुरू कर दी। बकौल स्वजन, कोलकाता से आजाद हिंद फौज का एक फौजी युसूफ कैप्टन गनी खां की तलाश में पहुंचा तो पता चला कि वह अभी तक लौटे ही नहीं। तब उसने बताया कि वह गनी खां का अर्दली रहा। उसने अज्ञात यात्रा पर जाने के लिए नेताजी के पास छोड़ा था, साथ में सरकारी डाक्टर रशीद भी थे। नेताजी के अनन्य सहयोगी कैप्टन अब्दुल गनी का पता नहीं चला। उनके बेटे अब्दुल कादिर खां ने आजीवन अपने पिता का इंतजार किया। उनके पौत्र एडवोकेट जावेद खां व नसीम रजा खां ने सरकार से मांग की है कि मिर्चा गांव में कैप्टन अब्दुल गनी के नाम पर सड़क, आजाद हिद स्मृति स्तंभ और गेट का निर्माण कराया जाए, ताकि आजादी के नायकों का बलिदान देश सदा याद रख सके।