ताड़ीघाट विद्युत उपकेंद्र में सोमवार की रात करीब साढ़े 12 बजे शार्ट सर्किट से आग लग गई। ट्राली से उठती लपटों को देख बिजली कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे फायरकर्मी तीन घंटे बाद आग पर काबू पा सके। इस घटना में चार ट्रालियां समेत एक इनकमिंग मशीन जलकर नष्ट हो गई।
इसकी वजह से करीब पचास गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। विभागीय अधिकारियों की मानें तो आपूर्ति सुचारु होने में करीब दस दिन का समय लग सकता है। उपकेंद्र में लगी आग ने करीब 65 हजार लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।
ताड़ीघाट उपकेंद्र से नगसर, गगरन, ताड़ीघाट, कल्याणपुर, सुहवल, गोपालपुर, तिलवा, डेढ़गावा, उधरनपुर, पकड़ी, डमुआ, रमवल, सोनवल, युवराजपुर, पटकनिया, बवाड़े, मेदिनीपुर, बहलोलपुर, कालूपुर, सुजानपुर, नरयनापुर, जंगीकापुरा सहित करीब पचास गांवों की बिजली आपूर्ति होती है। सोमवार की रात आपूर्ति चल रही थी। उपकेंद्र पर तैनात एसएसओ सहित अन्य कर्मचारी उपकेंद्र के बाहर सो रहे थे।
रात करीब साढ़े 12 बजे उपकेंद्र के अंदर से धुआं निकलता देख कर्मचारियों के होश उड़ गए। जब तक वे समझ पाते कि धुआं कहां से उठ रहा है, तेज आवाज के साथ उपकेंद्र आग का गोला बन गया। कर्मचारियों ने कंट्रोल को सूचना देकर आपूर्ति बंद कराई । आग की लपटे देख ग्रामीण भी उपकेंद्र पर पहुंच गए। मौके पर पहुंचे फायर कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से तीन घंटे बाद आग पर काबू पाया। इस घटना में 4 ट्राली सहित एक इनकमिंग जलकर नष्ट हो गई। अनापूर्ति की वजह से भीषण गर्मी में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली न रहने से पेयजल के लिए हाहाकार मच गया है। प्यास बुझाने के लिए लोगों को हैंडपंपों और कुओं तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। बिजली के अभाव में एक दर्जन राजकीय नलकूप और 50 निजी नलकूप प्रभावित हैं। सुबह उपकेंद्र पर पहुंचे अधिकारियों ने जले उपकरणों की जांच-पड़ताल की। विभागीय अधिकारियों की मानें तो नया ट्राली लगाने और जले हुए केबिलों को बदलने की में करीब दस का समय लग सकता है। इसके बाद ही आपूर्ति सुचारु हो सकेगी।