मंदिरों-मस्जिदाें तथा धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान चढ़ावे के फूल आने वाले दिनों में घरों, आंगनों और धार्मिक कार्यक्रमों में खुशबू बिखेरेंगे। इन फूलों के जरिए अलग-अलग सुगंध वाली अगरबत्ती और रंग बनाए जाएंगे। इन फूलों से तैयार होने वाले रंगों का प्रयोग होली में भी किया जा सकेगा। इसके प्रयोग से शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा।
इसके लिए दिल्ली की प्रभात सोसाइटी फार चाइल्ड डेवलपमेंट (अवाकायम) संस्था ने कदम आगे बढ़ाए हैं। संस्था की टीम द्वारा बुधवार को फूलों से अगरबत्ती और रंग बनाने का प्रशिक्षण शहर के राजेश्वरी विकलांग विद्यालय के मूक-बधिर बच्चों को दिया गया। यदि यह प्रयास रंग लाया तो चढ़ावे के फूलों से गंगा भी मैली नहीं होंगी।
शादी-समारोह हो या फिर धार्मिक अनुष्ठान इनमें तरह-तरह के फूलों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन आयोजनों के बाद इन फूलों को इकट्ठा कर अक्सर गंगा, नदी या फिर तालाबों में फेंक दिया जाता है। इससे गंगा समेत अन्य नदियां प्रदूषित होती हैं। इसको देखते हुए दिल्ली की प्रभात सोसायटी फार चाइल्ड डेवलपमेंट (अवाकायम) संस्था ने चढ़ावे के फूलों से अगरबत्ती और रंग बनाने का तरीका इजाद किया है।
इसके लिए संस्था की ओर से देश भर में जगह-जगह स्कूलों और संस्थाओं के बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को संस्था के सदस्यों की ओर से शहर के शास्त्रीनगर स्थित राजेश्वरी विकलांग एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र में अध्यननरत मूक-बधिर बच्चों को फूलों से अगरबत्ती और रंग बनाने का विधिवत प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान संस्था के कोआर्डिनेटर सुरेश तोमर और अंकित शर्मा ने बताया कि फूलों को इकट्ठा करके उन्हें पहले छांट लेना जरूरी है। फूलों की पंखुडि़यों और बीजों को अलग-अलग करके इन्हें धूप के बजाए छांव में सूखा लें। फूल जब सूख जाएं तो उन्हें अलग-अलग करके मिक्सी या फिर ग्राइंडर में पीस लें।
इसके बाद उसे आटे की तरह गूंथें। इसके बाद इससे अगरबत्ती और रंग तैयार किया जा सकेगा। बताया कि फूलों की पखुंडियों से तैयार होने वाले रंगों का प्रयोग होली में किया जा सकेगा। इससे तरह-तरह की खुशबू आएगी लेकिन शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। प्रशिक्षण के दौरान संस्था की ओर से धीरज कुमार, मुकेश कुमार के साथ ही राजेश्वरी विकलांग विद्यालय की संरक्षिका सविता सिंह तथा प्रधानाचार्य अमरनाथ गुप्ता ने अपना भरपूर सहयोग दिया।