महिला उत्पीड़न मामलों के समाधान के लिए बुधवार को जिले के थानों में शक्ति विशेष सुनवाई दिवस का आयोजन किया गया। लेकिन इसमें महिला फरियादियों की संख्या नदारद रही। पुलिस लाइन सहित जिले के अन्य थानों में भी कुछ यही स्थिति रही। यहां महज औपचारिकताएं ही पूरी की गईं। इसके पीछे उचित प्रचार-प्रसार का न होना मुख्य कारण बताया जा रहा है।
प्रदेश सरकार के निर्देश पर मुख्य सचिव आलोक रंजन की ओर से प्रत्येक महीने के पहले बुधवार को जिले के थानों में शक्ति विशेष सुनवाई दिवस के आयोजन के लिए बीते 19 जनवरी को जिले के पुलिस अधीक्षकों के पास पत्र भेजा गया था। पत्र में कहा गया था कि शक्ति विशेष दिवस के आयोजन के लिए पम्फलेट छपवाकर सिपाहियों और लेखपालों के जरिए जिले के सभी ग्राम प्रधानों मुहैया कराया जाए।
ताकि गांवों में इसका उचित प्रचार-प्रसार हो सके। लेकिन इस आदेश का पालन नहीं किया गया। 23 जनवरी को फिर इस आशय का पत्र जिला मुख्यालय को भेजा गया। बीते मंगलवार को एसपी की ओर से दिवस के आयोजन के संबंध में क्षेत्राधिकारियों और थानाध्यक्षों को पत्र निर्गत किया गया था।
लिहाजा बुधवार को थानों में शक्ति विशेष सुनवाई दिवस का आयोजन किया गया। लेकि न समय पर प्रचार-प्रसार नहीं होने की वजह से यहां महिला फरियादियों की संख्या नदारद रही, और सिर्फ औपचारिकता ही पूरी हो सकीं। इस संबंध में एसपी डा. उमेश चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम प्रधानों का सहयोग लिया जाएगा। ताकि अगले माह आयोजित होने वाले शक्ति विशेष सुनवाई दिवस में महिलाएं अपनी फरियाद लेकर ज्यादा से ज्यादा संख्या में आ सकें।