सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद जिले में तैनात कई अफसरों का रवैया नहीं
सुधर रहा है। घपला, घोटाला हो या फिर तहसील दिवस, समाधान दिवस में आने वाले
मामले, अपनी गर्दन बचाने के लिए अफसरों ने जांच के जुमले को अपना ढाल बना
लिया है।
आम फरियादियों की बात तो दूर, जनप्रतिनिधियों को भी अफसर जांच की
घुट्टी पिलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को जिला पंचायत की बैठक में
सदन के समक्ष जब जिला पंचायत सदस्यों ने कई बड़े मामलों की कलई खोली तो
जिम्मेदार अफसरों ने जांच की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया। जांच के नाम
पर कई बड़े मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाने की वजह से सरकार की खूब
किरकिरी हो रही है।
सरकार चाहती है कि फरियादियों की सुनवाई हो और उसकी
समस्याओं का निराकरण जल्द से जल्द हो लेकिन अफसरों को यह सब रास ही नहीं आ
रहा है। किसी वारदात की एफआईआर दर्ज कराना हर किसी के लिए टेढ़ी खीर बन
गया है। पुलिस मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कह कर पीडि़तों को
टरकाने से बाज नहीं आ रही है। यही हाल विभागीय अफसरों की भी है।
तहसील दिवस
के आयोजनों में फरियादियों की लंबी कतार लगती है और शिकायतों का ढेर सारा
पुलिंदा आता है लेकिन मामलों का निस्तारण करने के बजाए अफसर जांच की बात कह
कर फरियादियों को चलता कर दे रहे हैं। इसकी वजह से ही आम जन परेशान है।
केस एक
ठंडे बस्ते में छात्रवृत्ति घोटाला
जिले
के 85 से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों में छात्रवृत्ति एवं शुल्क
प्रतिपूर्ति के नाम पर करोड़ों का घोटाला पकड़ा जा चुका है। इसके लिए
छात्रों द्वारा न जाने कितने बार धरना प्रदर्शन किया गया। करीब छह माह
पूर्व शासन के निर्देश पर जिला स्तरीय तीस अधिकारियों की टीम गठित कर जांच
भी शुरू कराई।
लेकिन घोटालेबाजों के दबाव के कारण अब तक जांच पूरी नहीं हो
सकी। यदि जांच पूरी कर कार्रवाई की जाए तो इसमें कई बड़े चेहरे बेनकाब हो
सकते हैं, जिनकी पहुंच सत्ता तक है। घोटाले के खेल में शामिल रहे कई बैंक
अधिकारियों की भी गर्दन नप सकती है लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में ही डाल
दिया गया है।
केस दो-
नहीं बना हैंडपंपों का फाउंडेशन
बीते
शुक्रवार को जिला पंचायत की बैठक में जिले के विभिन्न हिस्सों में जल निगम
की ओर से लगवाए गए हैंडपंपों का मामला खूब उछला। जिला पंचायत सदस्यों ने
साफ कहा कि जो हैंडपंप लगवाए गए हैं, उनका फाउंडेशन अभी तक नहीं बनवाया गया
है जबकि कागजों में इस कार्य को पूरा होना दर्शाया गया है।
यानी फाउंडेशन
निर्माण की रकम हजम कर ली गई है। इस पर जल निगम के अधिशासी अभियंता ने जिला
पंचायत सदस्यों से हैंडपंपों की सूची उपलब्ध कराने तथा मामले की जांच कर
कार्रवाई सुनिश्चित कराने की बात कह कर अपना बचाव किया।
केस तीन
एमएलसी को पिलाई जांच की घुट्टी
पूर्वांचल
के गांधी कहे जाने वाले स्व. रामकरन यादव दादा के पुत्र और सरकार में पैठ
रखने वाले एमएलसी विजय यादव की भी अधिकारी नहीं सुनते। एमएलसी द्वारा वर्ष
2013-14 में 100 हैंडपंप लगाने का प्रस्ताव जल निगम को दिया गया था।
हैंडपंप तो नहीं लगे बल्कि उनका फर्जी हस्ताक्षर बनाकर सादात ब्लाक में 11
जगहों पर हैंडपंप लगवा दिए गए। जिला पंचायत ही नहीं जिला योजना की बैठक,
जिसमें जिले के प्रभारी मंत्री रामगोविंद चौधरी भी मौजूद थे, एमएलसी ने सदन
के समक्ष इस मामले को उठाया तो उन्हें जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन
दिया गया लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। बीते शुक्रवार को जिला पंचायत की बैठक में
एमएलसी ने इस मामले को फिर उठाया तो उन्हें फिर जांच की घुट्टी पिला दी
गई।
गंभीर
मामलों की चल रही जांच की निगरानी की जा रही है। जांच पूरी होने में समय
लगता है।देर ही सही, जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अवश्य
सुनिश्चित कराई जाएगी। तहसील दिवस के मामलों के निस्तारण में लापरवाही
बरतने वाले जिले के 32 जिम्मेदार अधिकारियों के जनवरी माह के वेतन भुगतान
पर रोक लगाई गई है। आगे और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नरेंद्र सिंह पटेल, डीएम गाजीपुर।