सेमरा-शिवराय का पुरा गांव के कटान पीड़ित दो साल से खानाबदोश का जीवन बसर कर रहे हैं। शासन-प्रशासन के तमाम आश्वासनों के कोरा साबित होने से नाराज लोगों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा।
कटान पीड़ितों ने उपजिलाधिकारी कार्यालय के पास धरना दिया। इस दौरान सेमरा, शिवराय का पुरा एवं बच्छलका पुरा को गंगा कटान से बचाने एवं विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए भूमि आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाया।
इस दौरान हुई सभा में गांव बचाओ आंदोलन के संयोजक प्रेमनाथ गुप्त ने कहा कि गांव का अधिकांश भाग गंगा कटान में चला गया है।
पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक की शीट डालकर दो वर्ष से रह रहे हैं। आपदा राहत कोष से मानक के अनुरूप पैसे बरतन के लिए 14 सौ, कपड़ा के लिए 15 सौ रुपये आज तक नहीं मिला।
स्थानीय प्रशासन की तरफ से कटान पीड़ितों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। कहा कि शासनादेश में कटान पीड़ितों को एक-एक बिस्वा भूमि देने का प्रावधान है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से 558 पीड़ितों की सूची बनाई गई है। सभी लोगों को मानक के अनुसार चेक भी दिया गया। इसके बावजूद अब 377 लोगों को ही भूमि आवंटित की जा रही है।
इससे बचे अन्य पीड़ित बेघर रह जाएंगे। उनके साथ इंसाफ होना चाहिए। धरना के बाद कटान पीड़ितों ने उप जिलाधिकारी त्रिभुवन विश्वकर्मा को आठ सूत्री मांगपत्र सौंपा।
उन्होंने मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। धरना में काशीनाथ उपाध्याय, जनार्दन यादव, हरिशंकर यादव, कमलेश, गोवर्द्धन पाल, हरेन्द्र पटेल, रोशन, सुदामी, रतरानी, कुसुम पटेल तथा सुंदरबाला मौजूद थीं।
बता दें दो वर्ष से गंगा कटान से पीड़ित रिश्तेदारों के यहां, सड़कों के किनारे अथवा विस्थापित कैंपों में खानाबदोश की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। पीड़ितों ने कई बार धरना-प्रदर्शन कर समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया गया लेकिन नतीजा सिफर है।