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Ghazipur News: आंगनबाड़ी भवन के निर्माण कार्य पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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पचौरी गांव में रुका आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य। संवाद
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सेवराई। तहसील क्षेत्र के पचौरी गांव में कंपोजिट विद्यालय परिसर में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्र पर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया। भदौरा विकास खंड के पचौरी गांव निवासी मनोज कुमार कुशवाहा ने बताया कि मेरी भूमि पर ग्राम पंचायत द्वारा जबरदस्ती सरकारी लाखों रुपये खर्च करते हुए आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण न कराने की अपील की गई, इसके बावजूद संबंधितों ने काम नहीं रोका। अवैध तरीके से मेरी भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र बना दिया गया। इस पर उच्च न्यायालय में अपील की गई। तथ्यों और साक्ष्यों को दृष्टिगत रखते हुए हाईकोर्ट ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए गहमर कोतवाल और तहसीलदार सेवराई को विवादित भूमि पर कोई नया निर्माण न करने के निर्देश दिए हैं। इस आशय की पुष्टि करते हुए ग्राम पंचायत अधिकारी कमलकांत सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। तहसीलदार सेवराई सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य रोके जाने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इससे पूर्व इसकी शिकायत मिली थी, विद्यालय परिसर में सरकारी जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जा रहा था, जो बाउंड्री के भीतर है। इस संबंध में रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की जा चुकी है।
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कोर्ट के आदेश पर मुसहर बस्ती में चला बुलडोजर
संवाद न्यूज एजेंसी

जमानियां। तहसील क्षेत्र के ग्राम बरूईन नहर पुलिया के समीप स्थित मुसहर बस्ती में शुक्रवार को न्यायालय के आदेश पर बुलडोजर चला। इस दौरान भारी पुलिस-बल की मौजूदगी में कब्जा हटाने की कार्रवाई पूरी की गई।
कोर्ट के अमीन दिलीप कुमार ने बताया कि अपर सिविल जज (जू.डि.) कक्ष संख्या-2, गाजीपुर के आदेश पर इजरा वाद संख्या–2 सन् 2017 गोरखनाथ सिंह आदि बनाम फागू आदि, ग्राम बरूईन, परगना–जमानियां से संबंधित मामले में कार्रवाई की गई। अदालत ने कब्जा-दखल की कार्यवाही के समय शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिया था। इस क्रम में पत्र संख्या सीए/सी-57/10 अक्तूबर 2025 के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची।
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बस्ती के राजाराम बनवासी ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियां यहां निवास कर रही हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें सरकार की ओर से पोखरे की जमीन दिए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद बलदेव सिंह ने विश्वास में लेकर उन्हें बसने के लिए यही स्थान दिया। वर्षों बाद अब जमीन पर मालिकाना हक का दावा करते हुए संबंधित पक्ष पुलिस बल के साथ पहुंचा और उन्हें बेघर कर दिया गया। वहीं, दूसरी ओर गोरखनाथ सिंह का कहना है कि जमीन उनकी पैतृक संपत्ति है और इस पर अवैध कब्जा हटाने के लिए बार-बार चेतावनी दी गई थी, परंतु बस्ती के लोगों द्वारा खाली करने से इन्कार किए जाने पर न्यायालय का सहारा लिया गया। न्यायालय के आदेश पर आज कब्जा हटाकर भूमि प्रशासन को सुपुर्द कर दी गई। कार्रवाई के दौरान क्षेत्राधिकारी अनिल कुमार, जनपद न्यायालय के सदर अमीन दिलीप कुमार यादव, कोतवाली प्रभारी प्रमोद सिंह, स्टेशन चौकी प्रभारी अश्वनी प्रताप सिंह समेत भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
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